हिम्बा जनजाति का जीवन गीत



शशि सिंह

दक्षिणी अफ्रीका में एक देश है नामीबिया। वहां एक जनजाति है हिम्बा। इस जनजाति में हर जन्म से जुड़ा होता है एक गीत। हिम्बाओं के जन्म के पहले से ही उनका जीवन गीत तय हो जाता है। यही गीत उनके जीवन का आधार है। हर हिम्बा की खास पहचान। हमारे आधार कार्ड से भी मज़बूत है उनकी यह संगीतमय पहचान!

देश के पहले आदिवासी उपन्यासकार



देश के पहले आदिवासी उपन्यासकार थे मेनस ओड़ेया (1884-1968)और पहला उपन्यास है 'मतुराअ: कहनिÓ। उपन्यास प्राचीन मुंडारी में 1920 के आस-पास लिखा गया। हालांकि यह बीसवीं शताब्दी के पिछले दशक में यानी 1984 में प्रकाशित हुआ, लेकिन लिखा गया बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में।

पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा



सिङबोंगा सखुआ के वृक्ष में वास करते हैं, जैसे गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, मैं पेड़ों में पीपल हूं। साखू, सखुआ या साल की सबसे बड़ी विशेषता है, वह पठारी-पहाडिय़ों की चट्टानों को फोड़ कर जन्म लेता है।

हाशिए पर सबसे प्राचीन जनजाति असुर

Johar झारखंड की सबसे प्राचीन जनजाति असुर हैं। दुनिया को लोहा गलाने की तकनीक असुर की देन है। असुर का फैलाव झारखंड में ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी है। दुनिया में देखें तो असीरिया को भी असुर का प्राचीन देश माना जाता है। खूंटी से लेकर गुमला-नेतरहाट की तलहटी में इनका निवास है। इनका साहित्य मौखिक ही है। हालांकि इनके इतिहास लेखन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। खूंटी में आज ...

बिरसा का सपना और गांवों की हकीकत

Johar सरवदा चर्च पर पहला तीर चलाया गया खूंटी गांव कांप उठा। डिप्टी कमिश्नर आए। वह बिरसा का पीछा कर रहे थे। बुद्धिमान लोग (बिरसा के अनुयायी) डोम्बारी पहाड़ पर चले गए। उन लोगों ने (ब्रिटिश सैनिकों का) मुंह बनाया और चुनौती दी। फौजों (ब्रिटिश) ने उन पर गोलियां चलाईं। एक मुंडा बच्चा जमीन पर गिरी अपनी मृत मां का दूध पीने की कोशिश कर रहा था। (अंग्रेज) महिला (डिप्टी कमिश्नर की पत्नी) बहुत द्रवित हुई। बच्चे का क्या हुआ? यह ...

झारखंड : आदिवासी महिलाओं का सियासी सफ़र

Johar 1951-52 और 1957 में हुए प्रांतीय चुनावों के दौरान आदिवासियों की झारखंड पार्टी ने 32 और 31 विधानसभा सीटों पर कब्जा करके तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नींद उड़ा दी थी। जयपाल सिंह मुंडा के करिश्माई नेतृत्व में आदिवासियों का संदेश बिल्कुल साफ था कि वे अलग झारखंड राज्य लेकर रहेंगे। इस लोकतांत्रिक करिश्मे के पीछे जहां जयपाल की मारक आदिवासी रणनीति थी तो इसकी सफलता का श्रेय उन लोगों को ...

नागरिकता से वंचित आदिवासी

Johar मई महीने की तपती धूप को झेलते हुए सारंडा जंगल में विचरण करते समय अचानक ही कुछ लोगों की आवाज सुनाई पड़ी। जंगल के बीचो-बीच तीर-धनुुष, बरछा, कुल्हाड़ी और गुलेल के साथ आदिवासी दिखाई पड़े। ये लोग शिकार पर निकले थे। यह कोई असामान्य बात नहीं थी। असामान्य बात यह थी कि ये आदिवासी थे पर भारतीय नागरिक नहीं। हमें देखते ही इस उम्मीद के साथ अपनी समस्या सुनाने लगे ...

मयूरभंज में मोदी के होने का मतलब

Johar प्रधानमंत्री मोदी 2019 की अपनी पहली चुनावी सभा पांच जनवरी को ओड़िसा के आदिवासी बहुल मयूरभंज में करेंगे। इस सभा के द्वारा वे राज्य के लाखों आदिवासी वोटरों को लुभाने की जुगत में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 33 सीटें जीती थीं जो आदिवासी क्षेत्रों की हैं। पर क्या ये सिर्फ ओड़िसा का मामला है या फिर इस चुनावी सभा से वे देशभर के आदिवासियों के बीच पैठ ...
 

समाजनामा

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