कंठों में बसे हैं करम के गीत



युगल किशोर पंडित

खेतों में हरे-हरे फसल लहलहा रहे हैं। मकई और मडुआ गदरा गया है। धान की बालियां पौधों से बाहर निकलने को व्याकुल है। नदियां हिलोरें ले रही हैं। तालाब पानी से लबालब भर गया है। रिमझिम फुहारें मन को भा रही हैं तो उधर करमइती बहनें ससुराल से मायके आ चुकी हैं। आए भी क्यों नहीं। करमा का त्योहार जो आ्रया है। अखरा में मांदर की थाप पडने के साथ ही करमा की खुमारी चढ़ गई है। भादो महीने के आगमन के साथ ही नवविवाहिता बहनें करम डाइर से मिलने, झूमर खेलने और करमा गीत गाने के लिए मायके आने लगी थीं। करमा पर्व में गीत और नृत्य का खास महत्व है। त्योहार के दौरान जवा जगाते हुए युवतियां समूह में गीत गाते हुए नृत्य भी करती हैं। इस दौरान गाए जानेवाले गीतों का कोई रिकार्ड नहीं है और न ही इसकेे गीतकार का कोई अता-पता है। हां, ये गीत इतने सरल और सहज हैं कि महिलाओं को सस्वर कंठस्थ है। बस, सालभर में एक सप्ताह का रियाज ही समझिए। वर्षों से ये गीत एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होते आया है।

गीतों में हड़प्पा, सिंधु व उज्जैन का जिक्र

यूं तो झारखंड के रग-रग में रचा-बसा प्रकृति पर्व करमा भाई-बहन के अद्भुत सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है परंतु पर्व के दौरान सप्ताह भर गाये जाने वाले गीतों की सरलता, सहजता, समरसता व विशिष्टता इसे उकृष्ट पहचान दिलाती है। इसके गीतों में राज्य की सभ्यता और संस्कृति की सौंधी खुशबू है। इतना ही नहीं करम के गीतों में प्राचीन कालीन सिंधु घाटी व हड़प्पा सभ्यता की झलक मिलती है। जवा डाली के चारों ओर घूमते हुए युवतियों द्वारा गाया जाने वाला एक गीत देखिए- कइसें जे गेलंय भइया सिंधु के पार गो....तोर बिना कांदे बहिन हडप्पें झुराय...। इस गीत में हड़प्पा सभ्यता के विध्वंस का जिक्र है। एक दूसरा गीत देखिए- ताहि तरें भेंटाइल गेहुमन सांप रे... छाडु-छाडु गेहुमन उजइनी के घाट। इस गीत में उज्जैन का जिक्र है। गीतों से ऐसा प्रतीत होता है कि इस पर्व को मनाने के परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।

करमा के कुछ लोकप्रिय गीत
कुछ प्रमुख करमा गीत जो युवतियों द्वारा गाया जाता है, इस प्रकार हैं- करम चलि आइल रे धरम चलि आइल..., आई गेलय भादो आंगन में कादो, भाई रीझ लागे..., परलय भादर मास, कबे अइतय भइया लेनिहार...आवइतें जाइतें फूला तोइर लेबय नांय... नदी धारें फूल फूले अहरें कि पहरें...करमा तिहार आयो हय, नाचे जाबो रे...जा-जा हो करम गोसांय जा ससुराइर हे...। इसके अलावा भी कई लोकप्रिय गीत हैं जो प्राकृतिक सौंदर्य व भाई-बहन के अटूट प्यार का खांका खींचता है। करमा स्थानीय भाषा, कला, सभ्यता व संस्कृति का वाहक है।