क्या सुशांत सिंह की मौत उठाएगा सच से पर्दा ..



परवेज कुरैशी की खास रिपोर्ट

34 वर्षीय सुशांत सिंह राजपूत एक उभरता हुआ सितारा जो शायद बहुत देर तक चमकता, लेकिन वक्त से पहले बुझ गया। 14 जून 2020 को उसकी मौत की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इसकी रहस्यमई मौत ने कई तरह के विवाद को जन्म दे दिया। अब सीबीआई जांच हो रही है, लगभग सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत के दोषियों के करीब पहुंच जाएगी।
सुशांत सिंह राजपूत केदारनाथ, रबता, छिछोरे, सोन चिडिय़ा, नीरज पांडे की एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में काम कर चुके हैं। इस दौरान रांची के रेडिशन ब्लू होटल में कार्यक्रम में भेंट भी हुई थी। सुशांत बिहार, पटना के रहने वाले थे। टीवी सीरियल के रास्ते से बॉलीवुड में जगह बनाई। सुशांत ने चांद पर जमीन प्लॉट मसकोवी में भूमि इंटरनेशनल लूनर लैंड रजिस्ट्री से खरीदी थी, जिसकी निगरानी जमीन पर रहकर एडवांस टेलीस्कोप 14 एल एक्स 00 दूरबीन से करते थे। उनके चचेरे भाई नीरज बबलू बीजेपी विधायक हैं और जीजा आइपीएस अधिकारी, पैसों की कमी नहीं थी।

कोरोना संक्रमण के दौर और देश लॉक डाउन था। मजदूर, छात्र-छात्राएं सहित हर तरह के लोग परेशान थे। ऐसे समय में अभिनेता सोनू सूद की तरह सुशांत मदद करते सड़कों पर नजर नहीं आए। लेकिन उनकी दुखद मौत की खबर ने सभी को हैरत में डाल दिया। सुशांत की मौत, आत्महत्या, हत्या जैसे विवाद का जन्म दे दिया। अब सीबीआई जांच हो रही है, तो उम्मीद है, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इस सीबीआई जांच से लोगों को यही उम्मीद है कि राज का पर्दाफाश हो, दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं। इसी के साथ विभिन्न तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं कि इस कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में हमारे बीच कई जाने-माने चेहरे दुनिया छोड़ गए। लेकिन सबसे दुख की बात यह है कि बालीवुड में लंबे समय से कुछ ऐसी कई घटनाएं घटी है जो आत्महत्या से संबंधित रहीं, जो एक जांच का विषय है। वहीं सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सबसे ज्यादा अगर कोई विवाद हो रहा है तो नेपोटिज्म को लेकर। इन दिनों पूरे देश भर में यही चर्चा है कि यहां फिल्मों में खासकर भाई, भतीजावाद वंशवाद की परंपरा रही है।

दूसरे राज्यों से आए हुए कलाकारों को बहुत स्ट्रगल करना पड़ता है। यहां हीरो-हीरोइन बनने के सपने लेकर तो पहुंच जाते हैं लेकिन उन्हेंं कई तरह की समस्याओं से भी गुजरना पड़ता है। कुछ लोगों की बातें सामने आ जाती है और कुछ बॉलीवुड की चकाचौंध में कहीं दब जाती है। यहां छींटाकशी भी खूब होती है, एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए सारी हदें पार कर दी जाती हैं। यह मैं नहीं कह रहा हूं बल्कि बॉलीवुड में जब से सुशांत सिंह की मौत की घटना के बाद से विभिन्न न्यूज चैनलों में इस तरह की खबरें आ रही है, सोशल साइटों पर तूल दिये जा रहे है। बहुत हद तक इसमें सही हो सकता है लेकिन जिस तरह से तूल दिया जा रहा है खास करके झारखंड बिहार के उन कलाकारों को बॉलीवुड में आगे काफी समस्याओं का सामना कर पड़ सकता जो स्ट्रगल करते हैं।

मुझे लगता है कि जब मेरी यह खबर आपके हाथों में होगी तब तक कातिल पकड़े भी जा चुके होंगे और एक रहस्यमई मौत से पर्दा उठ चुका होगा । शुरुआत में सुशांत सिंह राजपूत को लेकर यह कहा जा रहा था कि बॉलीवुड के कई दिग्गज इसके मौत के कारण है। लेकिन जैसे-जैसे सीबीआई जांच आगे बढ़ रही है, सुशांत सिंह राजपूत के जो करीबी लोग रहे हैं दोस्तों, कुक, ड्रग, उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है, शायद यहां से उन्हेंं कोई बड़ा सुराग मिले सके। और यह जांच तेजी से होनी चाहिए कहीं बिहार चुनाव को लेकर जांच अधर में लटक ना जाए! खैर मैं आपको यह बता दूं कि अब तक न सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत की मौत का रहस्य है, बल्कि इनकी भी मौत से पर्दा नहींं उठ सका है।

मौत जो चीख रही है


साठ के दशक के मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक गुरुदत्त का नींद की गोली खा लेने से उनकी असामयिक मौत हो गई थी। मौत के पीछे कई तरह की बातें बताई गई। तब, अब की तरह सोशल साइट्स नहीं थे और न ही बहुत सारे न्यूज़ चैनल खबरें बहुत देर से लोगों तक पहुंचती थी। मौत आज भी रहस्य बनी है। इस बीच सबसे बड़ी घटना अगर मानी जाए तो 5 अप्रैल 1993 को सुप्रसिद्ध अभिनेत्री दिव्या भारती जो अचानक पांचवीं मंजिल की खिड़की के मुंडेर पर बैठी हुई थी और गिर गई और जिस कारण उसकी मौत हो गई। इसमें कई बॉलीवुड के दिग्गजों के नाम शुरुआती दौर में आए थे समय गुजरता गया और नाम गुम होते चले गए और फाइलें बंद हो गईं। आज तक पता नहीं चल सका कि दिव्या भारती की मौत किन कारणों से हुई और इसके पीछे कौन लोग थे? इसके बाद सबसे जो चर्चित रहा है 2013 का निशब्द और गजनी में अभिनय कर चुकी जिया खान की मौत। इसके बाद 2015 में तेलुगु फिल्म के नायक जो लगभग 300 फिल्मों में काम कर चुके रंगनाथ ने भी आत्महत्या कर ली। 2016 में बालिका वधू सीरियल की आनंदी के किरदार निभाने वाली प्रत्यूषा बनर्जी की मौत जो सवाल बनकर उठा हीं नहीं। वहीं 2017 में हिंदी फिल्म के चॢचत अभिनेता जितेंद्र के चचेरे भाई नितिन कपूर भी एक बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी थी। हिंदी फिल्म की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी की मौत 24 फरवरी 2018 दुबई संयुक्त अरब अमीरात में टब में भरे पानी में डूबने से हुई, ऐसा बताया गया। लेकिन मौत का कारण आज भी पता नहीं चला। दिसंबर 2019 में टीवी अभिनेता कुशल पंजाबी ने भी आत्महत्या कर ली थी। 25 जनवरी 2020 को टीवी अभिनेत्री सेजल शर्मा ने आत्महत्या की खबरें आई। 16 मई 2020 को मनमीत ग्रेवालअभिनेता ने भी आत्महत्या कर ली । 27 मई टीवी एक्टर प्रेक्षा मेहता की आत्महत्या भी रहस्य है। इसके बाद सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व सेक्रेटरी रही दिशा सल्यान ने भी जून में छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी और इसके ठीक कुछ दिन बाद 14 जून को ही सुशांत सिंह राजपूत की मौत। इसी बीच 26 जून टिक टॉक स्टार सिया कक्कड़, 3 जुलाई को टिक टॉक स्टार संध्या चौहान, 8 जुलाई को कन्नड़ टीवी स्टार सुशील गौड़ और 19 जुलाई को मराठी अभिनेता आशुतोष भाकरे व 2 अगस्त को भोजपुरी फिल्म की अभिनेत्री अनुपमा पाठक, 6 अगस्त को टीवी एक्टर समीर शर्मा ने भी आत्महत्या कर ली। लेकिन इन लोगों पर उतना चर्चा नहीं की गई और न ही इनके मौत पर सवाल उठाया गया, कि उन्होंने आत्महत्या की है या इनकी हत्या हुई है या फिर किन कारण से मौतें हुई हैं। अगर चर्चा हो रही है तो सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत की।

अब सवाल यह उठता है कि बालीवुड में भाई, भतीजावाद और वंशवाद का जो आरोप लग रहा है ,तो इस पर यही कहना चाहूंगा कि जिसमें काम करने की क्षमता होती है, जो दर्शकों को कुछ नया देने का माद्दा रखता है वहीं बॉलीवुड में चमकता है। उन्हीं की तस्वीर प्रशंसकों के घर, दुकानों में टंगी नजर आती है। मैं ऐसे कई नायक नायिका के बारे में बताना चाहूंगा जिनके पिता, भाई बॉलीवुड में स्टार रहे हैं लेकिन उसका बेटा या भाई को दर्शकों ने पसंद नहीं किया है।

वंशवाद क्या चल पाया
पृथ्वीराज कपूर के 3 पुत्र थे राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर यह तीनों भाई दर्शकों के दिल में छाए रहे। वही राज कपूर के 3 पुत्र थे ऋषि कपूर, रणधीर कपूर, राजीव कपूर । ऋषि कपूर नए अंदाज के कारण उनका जादू तीन दशकों तक दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता रहा। लेकिन रणधीर कपूर को कुछ समय तक उपलब्धि तो मिली लेकिन उनके छोटे भाई राजीव कपूर राम तेरी गंगा मैली के बाद से किसी फिल्म में सफलता हासिल नहीं हुई। हालांकि राम तेरी गंगा मैली की नायिका मंदाकिनी ही स्तनपान सीन दिखाकर सारी क्रेडिट ले गई। रणधीर कपूर की दो बेटियां करिश्मा कपूर और करीना कपूर का जादू लंबे समय तक बरकरार रहा करीना कपूर का जादू अभी दर्शकों में सिर चढ़कर बोल रहा है। शशि कपूर के बेटे करण कपूर एक दो फिल्मों में आये असफल रहे विदेश चले गये। वही ऋषि कपूर का बेटे रणबीर कपूर युवा के दिलों में अपनी जगह बनाने में लगे हैं। वही देवानंद के बड़े भाई चेतन आनंद फिल्म निर्माता निर्देशक के रूप में बॉलीवुड में रहे। अपने भाई देव आनंद और विजय आनंद को मौका दिया। देव आनंद की लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है। लेकिन विजय आनंद इसमें सफल नहीं हो सके। देव आनंद अपने पुत्र सुनील आनंद को 80 के दशक में आनंद ही आनंद फिल्म में लेकर आऐ, लेकिन दर्शकों को आनंदित नहीं कर पाए। अशोक कुमार, किशोर व अनूप कुमार भी रहे। अफगानिस्तान मूल के सलीम खान जो बेहतरीन स्क्रिप्ट राइटर माने जाते हैं और कई ऐतिहासिक फिल्मों की स्क्रिप्ट उन्होंने लिखी है। उन्होंने खुद भी छोटे-मोटे फिल्मों में काम भी किया है। लेकिन उनका बेटा है सलमान खान,अरबाज खान, सोहेल खान फिल्मों में आए लेकिन जो मुकाम सलमान खान को मिला, वह सोहेल और अरबाज को नहीं मिल पाया। वही स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद और पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन के वंश से संबंध रखने वाले पर आमिर खान जिनके पिताजी ताहिर हुसैन, चाचा नासिर हुसैन जो फिल्म निर्माता-निर्देशकरहे हैं आमिर खान इस वंशज के ऐसे सपूत हैं जिनका जादू आज भी बरकरार है। वहीं भाई फैसल खान को दर्शकों ने नापसंद कर चुके हैं। वही शॢमला टैगोर जो साठ के जमाने में फिल्म बिकनी पहन कर तहलका मचा दी थी उनके प्यार के चर्चे बॉलीवुड से निकलकर क्रिकेट के मैदान में भी छाया रहा और मशहूर भारतीय क्रिकेटर नवाब पटौदी से शादी कर ली। उन्हीं के पुत्र सैफ अली खान और सोहा अली खान का जलवा उतना नहीं चमका जितना शॢमला टैगोर का। बॉलीवुड के मशहूर विलेन प्राण के बाद अगर किन्ही का नाम आता है तो वह अमरीश पुरी का। इनके बड़े भाई मदन पुरी और ब्लैक एंड वाइट जमाने में खलनायक की भूमिका निभाने वाले चमन पुरी का रहा है। लेकिन अमरीश पुरी काफी सफलता हासिल की है और दर्शकों के दिलो-दिमाग में छाया रहा। मशहूर गीतकार कैफी आज़मी को नहीं भूलाया जा सकता उनका भी वंशज बॉलीवुड में अच्छा खासा काम कर रहा है जिसमें शौकत आज़मी ,शबाना आज़मी, फरहा ,तब्बू ,जावेद अख्तर, फरहान अख्तर को जोड़ कर देखा जा सकता है। वहीं स्टाइलिश और स्मार्ट फिरोज खान अपने जमाने में कई बेहतरीन फिल्मों का निर्माण भी कर चुके हैं। उनके भाई संजय खान और अकबर खान भी 70 के दशक में फिल्मों में नजर आ चुके हैं। लेकिन जो उपलब्धि फिरोज खान को मिली उस उपलब्धि से संजय खान और अकबर खान महरूम रहे। इतना ही नहीं फिरोज खान ने अपने बेटे फरदीन खान को भी प्रेम अगन और जंगल में लांच किया लेकिन वह दर्शकों के दिलों में जगह नहीं बना पाए। संजय खान ने भी जो उपलब्धि टीपू सुल्तान से मिली थी, उसी के दम पर अपने बेटे जायद खान में फिल्मों में लाये लेकिन वह बॉलीवुड में सुल्तान बनने में कामयाब नहीं हुए।

संघर्ष के बलबूते बनाई पहचान
इसमें मैं वैसे कलाकारों के बारे में बताने जा रहा हूं जिन्होंने अपनी मेहनत काबिलियत और अंदाज़ के बलबूते पर लंबे समय तक दर्शकों के दिल में छाए रहे कैंटीन में काम करने वाले युसूफ खान को मशहूर फिल्म अभिनेत्री देविका रानी ने ज्वार भाटा में काम दिलवायी और युसूफ से दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के आइकॉन बन गए दिलीप कुमार की फिल्म को देखकर पंजाब से अपना घर बार छोड़कर भागे धर्मेंद्र को काफी स्ट्रगल करना पड़ा होटलों में काम की और फिर फिल्म दिल भी तेरे हम भी तेरे में मौका मिला। दिलीप कुमार से प्रभावित होकर मनोज गोस्वामी जिन्हे हिंदी सिनेमा का भरत कुमार कहते हैं उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रख लिया और कई फिल्मों में काम किया लेकिन देशभक्ति फिल्मों के लिए उन्हेंं ताउम्र याद किया जाएगा। संजीव कुमार और सुनील दत्त, प्राण अजीत उर्फ हामिद खान, रेल के डब्बे में गुजर बसर करनेवाले ओमपुरी के संघर्ष को नहीं भुलाया जा सकता। आॢटफिशियल ज्वेलर्स बेचने वाले कम पढ़े लिखे रवि कपूर जिसे हिंदी सिनेमा में जितेंद्र के नाम से जाना जाता है उन्हेंं वी शांताराम ने अपनी फिल्म सेहरा में चांस दिया और उसके बाद गीत गाया पत्थरों में लीड रोल दिया। इसी तरह से अफगानिस्तान मूल के कादर खान मुंबई के चाल में रहते थे और लोगों के नकल उतारते थे और थियेटर करते थे। जिसमें दिलीप कुमार ने उन्हेंं पसंद किया और उन्हेंं अपनी फिल्म बैराग में मौका दिया। कादर खान एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने हर किरदार को जीवंत किया है। स्क्रिप्ट राइटर से लेकर हास्य भूमिका, खलनायक तक में उनका कोई जवाब नहीं था। गली का एक लफंगा और टायर दुकान में काम करके परिवार चलाने वाला जैकी श्रॉफ जिसे जग्गू दादा के नाम से जाना जाता है उन्हेंं सुभाष भाई ने मौका दिया और हीरो बना दिया, फिर वह पीछे मुड़कर नहीं देखा। कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद अशिक्षित युवा नक्सलबाड़ी आंदोलन से जुड़े मिथुन चक्रवर्ती पुलिस के डर से बंगाल छोड़कर मुंबई में शरण ले लिया। इस बीच उन्हेंं मृणाल सेन फिल्म मृज्ञा में मौका दिया, हालांकि मिथुन अमिताभ की एक फिल्म में एक सीन में नजर आ चुके थे। मिथुन चक्रवर्ती डिस्को डांसर के रूप में बॉलीवुड को एक नई पहचान दी। गरीबी और बेबसी की जीवन जी रहे हैं गोविंदा हालांकि इनकी मां फिल्मों में छोटे-मोटे काम किया करती थी, लेकिन उनका बेटा कभी स्टार बनेगा यह किसी ने सपने में नहीं सोचा था। गोविंदा ने अपने दम और डांस के बलबूते पर जो उपलब्धियां हासिल की है वह अपने आप में रिकॉर्ड है। गोविंदा के डांस रिकॉर्ड तोडऩे के लिए अब तक कोई अभिनेता पैदा नहीं हुआ। वहीं राज कपूर के साथ उनकी फिल्मों में पर्दा के पीछे काम करने वाले सुरेंद्र कपूर कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका बेटा अनिल कपूर हिंदी फिल्म का स्टार होगा और एक बेटा बोनी कपूर निर्माता निर्देशक लेकिन उसका तीसरा बेटा संजय कपूर असफलता की दुनिया में कहीं गुम हो जाएगा ।यह शायद ही किसी ने कल्पना की थी कॉमेडी किंग के नाम से मशहूर महमूद, जॉनी वाकर, केस्टो मुखर्जी और 90 के दशक में जॉनी लीवर यह हास्य अभिनेता है जो अपनी मजबूरी, अपनी गरीबी को मिटाने के लिए फिल्मों में आए थे। उन्हीं मे से जगदीप भी एक है। हालांकि जो प्रसिद्धि जगदीप को मिला उनके बेटे जावेद जाफरी और नावेद जाफरी को नहीं मिली, जबकि जावेद जाफरी एक बहुत अच्छे डांसर भी हैं, जिसकी प्रशंसा की जा सकती है। इन मेहनतकश कलाकारों में शाहरुख खान को नहीं भूलाया जा सकता है। उन्होंने दिल्ली से निकलकर दूरदर्शन में प्रसारित सीरियल फौजी,सर्कस में अभिनय करने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाए और बॉलीवुड के बादशाह बन बैठे। इसी तरह से मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण घर-घर में देने वाले अक्षय कुमार को एक्शन मास्टर भी कहा जाता है। उन्होंने ना सिर्फ एक्शन फिल्में की बल्कि हास्य फिल्मों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है । इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मनोज वाजपेई, गुलशन ग्रोवर, कंगना राणौत, जिनका बॉलीवुड में न गॉडफादर है और न ही यह लोग करोड़पति थे जो अपने पैसे के दम पर बॉलीवुड में काम कर सकते थे। इन्होंने अपने अभिनय के दम पर अपनी अदाकारी के बल पर दर्शकों के दिल पर अपनी जगह बनाई।

सफल पिता के असफल पुत्र
ऐसे भी कलाकार हैं जिनके पिताजी और भाई का अभिनय का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला है, लेकिन वही उनके पुत्र या भाई को असफलता हाथ लगी है। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन जिनकी मां तेजी बच्चन का दिवंगत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा जी से दोस्ती थी जिस कारण से अमिताभ बच्चन को कई असफल फिल्म देने के बाद भी लगातार फिल्में मिलती रही और वह बॉलीवुड का शहंशाह बन गया । लेकिन उनका बेटा अभिषेक बच्चन फिल्म रिफोजी से आया और कई हिट फिल्मों में काम किया लेकिन वह बालीवुड का शाहजादा नहीं बन पाए । बिहारी बाबू के नाम से प्रसिद्ध शत्रुघ्न सिन्हा संपन्न परिवार है उन्होंने पुणे इंस्टीट्यूट से निकलने के बाद छोटे-छोटे रोल करके बॉलीवुड में धाक जमा दिया और बिहार झारखंड के लिए प्रेरणा स्रोत बने। लेकिन अपनी पुत्री सोनाक्षी को कितना सफल बना पाएंगे कि आने वाला समय बताएगा । इतना ही नहीं हिंदी फिल्म के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की दोनों बेटियां रिंकी खन्ना और ट्विंकल खन्ना को सफलता नहीं मिली। यही हाल धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी खुद तो ड्रीमगर्ल रही लेकिन अपनी बेटी को ड्रीम फिल्में नहीं दिला सकी और ईशा देओल कई फिल्मों में आने के बाद भी असफल रही। हीमैन धर्मेंद्र के 2 पुत्र हैं। सनी देओल को जो प्यार दर्शकों से मिला है वह प्यार उनके छोटे भाई बॉबी देओल को नहीं मिला। राजेंद्र कुमार जिसे सिल्वर जुबली स्टार कहा जाता है और उन्होंने अपने संघर्ष के बल पर बॉलीवुड में जगह बनाई थी, लेकिन अपने पुत्र कुमार गौरव को फिल्म लव स्टोरी और नाम के अलावा कुमार गौरव का जलवा किसी और फिल्म में नजर नहीं आई। यही हाल विनोद खन्ना के पुत्र राहुल खन्ना का भी रहा उन्होंने अर्थ फिल्म में काम किया उसके बाद से कहीं गायब हो गए। अक्षय खन्ना को कुछ फिल्मों में पसंद जरूर किया गया। जितेंद्र जिनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं पुत्र तुषार कपूर असफलता की सीढ़यिां चढ़ता गया। वहीं उनकी पुत्री एकता कपूर सीरियलों में अच्छा खासा पहचान बनाई है। मिथुन चक्रवर्ती अपने पुत्र मिमोह चक्रवर्ती के साथ जिम्मी बनाया जो असफल रहा। अपने समय की सुपरस्टार माला सिन्हा की पुत्री प्रतिभा सिन्हा 90 के दशक में कई असफल फिल्में देने के बाद वह अब गायब सी हो गई है। जैकी श्रॉफ ने काफी बेहतरीन काम किया और उनके बेटे को भी लोग पसंद कर रहे हैं , लेकिन कितना आगे तक पसंदीदा बने रहेंगे यह समय बताएगा। रोशन परिवार का भी चर्चा कर दूं उनके पुत्र राकेश रौशन अभिनय में धमाका नहीं कर सके, लेकिन निर्देशक के रूप में उन्हेंं यादगार फिल्में बनाई है। उनके पुत्र रितिक रोशन भी गिने-चुने फिल्मों मैं ही नजर आते हैं डांस के लिए उन्हेंं याद किया जाता है। एक्शन मास्टर वीरू देवगन के बेटे अजय देवगन और डॉन ,त्रिशूल में सेठी की भूमिका करने वाले एमडी सेठी के पुत्र रोहित शेट्टी काफी सफल फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। मशहूर गायक मोहम्मद रफी का ना कोई भाई न कोई पुत्र इंडस्ट्री से जुड़े। वही मशहूर गायक किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार बहुत बेहतर नहीं कर पाए। वही हाल मशहूर गायक मुकेश के पुत्र नितिन मुकेश के साथ हुआ और उनके पुत्र नील नितिन मुकेश जो कुछ फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं वह भी असफल ही रहे। तनुजा की बेटी काजोल बॉलीवुड में जगह बनाई तो वही अपने समय के स्टार नूतन का बेटा मोहनीश बहल विलेन के रूप में असफल साबित हुआ। ऐसे भी कई नायक, नायिका, गायक, गायिका, गीतकार म्यूजिशियंस बॉलीवुड में रहे हैं जो खुद भी असफल रहे हैं और उनके बच्चे भी असफल साबित हुए हैं। कई ऐसे कलाकार जिसके अंदर बहुत सा हुनर है और उसे मौका नहीं मिला। ऐसे भी रहे है एक-दो सुपरहिट फिल्मों के बाद गायब से हो गए। जैसे पचास के दशक में फिल्म बैजू बावरा मीना कुमारी भारत भूषण, भारत भूषण कैरेक्टर रोल कर जीवन गुजारा। 1964 में सूरज बडज़ात्या का दोस्ती जिसमें सुशील कुमार और सुधीर कुमार की यादगार भूमिका रही जो बाद में दोनों कलाकार कहीं गुम हो गए। नदिया के पार की नायिका साधना सिंह, हम आपके हैं कौन की भाभी का किरदार निभाने वाली रेणुका शहाणे, आई मिलन की रात के नायक अविनाश माधवन, मैंने प्यार किया की नायिका भाग्यश्री, आशिकी फेम राहुल राय, अन्नू अग्रवाल, ममता कुलकर्णी, मदाकनी, लव स्टोरी फिल्म विजेता पंडित, कुमार गौरव इन सब की फिल्में अपने समय में सुपर हिट रही, लेकिन यह नायक, नायिका दूसरे तीसरे फिल्मों के बाद से ही गायब होते चले गए। इसलिए बॉलीवुड में यह कहना सही नहीं होगा कि यहां पर भाई, भतीजावाद, वंशवाद की चलती है। यहां पर उन्हीं की चलती है जो अपने सिनेप्रेमियों को कुछ नया और अलग देने की क्षमता हो।

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