नर-भक्षी बना नर-हितकारी



पी के सिद्धार्थ

अपने पुलिस करियर में कई जिलों में पदस्थापित रहा। इनमें अन्य जिले अगर कहानी थे तो तत्कालीन बिहार का पलामू जिला एक उपन्यास था। इसमें कई स्तरों पर सामानांतर चलती हुई कहानियां थीं, और अनेक अलग-अलग चरित्र या किरदार थे। एक और मदन कृष्ण वर्मा, हजारीलाल शाह, परमेश्वरी दत्त झा, पूरन बाबू जैसे चरित्र थे तो दूसरी और इनके ठीक विपरीत अनोखे चरित्र भी थे।

बाढ़, बिहार और चुनाव



बिहार विधानसभा चुनाव यदि तय समय पर हुए, तब अगले दो महीने चुनावी घमासान के होंगे ,और इसी साल नवंबर में नई सरकार का गठन होगा . हालांकि बिहार की स्थिति भयावह है . लोगों में एक गहरी उदासी और गुस्सा है . बाढ़ तो खैर यहाँ लगभग हर वर्ष आती रही हैं ,लेकिन कोरोना के कहर ने पहले से ही बेहाल सूबे को कुछ और बदहाल कर दिया है ...

बेरूत की तबाही



मंगलवार, 4 अगस्त को हुए एक बड़े विस्फोट में लेबनान के बेरुत शहर के बंदरगाह क्षेत्र में व्यापक क्षति हुई । लेबनान में बचावकर्मी मंगलवार को बेरूत में एक विनाशकारी विस्फोट में जीवित बचे लोगों की तलाश में मलबे में खुदाई और खोज कर रहे हैं, जिसमें कम से कम 137 लोग मारे गए और लगभग 5,000 अन्य घायल हो गए। विस्फोट बंदरगाह पर एक गोदाम में रखे 2750 टन ...

1942 में अरगोड़ा स्टेशन में लगा दी थी आग


गांधी के आह्वान का पुरअसर रांची में भी दिखा। अगस्त क्रांति की धमक पठार पर भी सुनी गई। छोटानागपुर व संताल परगना नौ अगस्त से लेकर 18 अगस्त धधकता रहा। रांची में नौ को हड़ताल रही। संध्या जिला कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में तालाबंदी कर दी गई। इस आंदोलन में आदिवासियों ने भी भाग लिया था। टाना भगतो की बड़ी भूमिका रही।

चीन का भू-राजनीतिक हथियार

अतुल शर्मा
कई शताब्दियों पहले, महान चीनी दार्शनिक सूर्य त्ज़ु ने देखा था: “पानी की प्रकृति ऐसी है कि यह ऊंचाइयों तक पहुंचता है, और जब एक बांध टूट जाता है, तो पानी अथक बल के साथ झरते हुए फिर तराई क्षेत्रों तक पहुँचता है और तब पानी का आकार सेना जैसा दिखता है। दुश्मन की असमानता का लाभ उठाएँ और जब उसे इसकी उम्मीद न हो तो उस पर ...

अब बलूचिस्तान की आज़ादी का समय

Johar पाकिस्तान में बलूच राष्ट्रवादीयों पर पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी शासन द्वारा लगातार किए जा रहे दमन के चरमोत्कर्ष के बाद अपनी आज़ादी के लिए पाकिस्तानी सेनाओं पर लगातार हमलों में वृद्धि ने CPEC सहित चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं को जोखिम में डाल दिया है और इसके कारण लागतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जबकि अरब सागर में स्थित ग्वादर पोर्ट पर उसके रणनीतिक हितों को लेकर ...

झारखंडी राजनीति की फितरत

Johar झारखंड की राजनीति एक लाइन में लिखनी हो तो बस इतना ही काफी है, इसकी फितरत चुनाव पूर्व मैदान में और इसके बाद विधानसभा में दिलचस्प मोड़ लेती रही है। न चुनाव तक चैन, न चुनाव के बाद। बेचैन राजनीति राज्य को जितनी तसल्ली दे सकती है, उतना झारखंड को दे रही है। परिणाम, ब्यूरोक्रेसी में बार-बार बदलाव, वक्र्स और खैरात वाले विभागों में खूब दिलचस्पी, राशि का एकतरफा प्रवाह ...
 

समाजनामा