1942 में अरगोड़ा स्टेशन में लगा दी थी आग



चौराहा टीम

गांधी के आह्वान का पुरअसर रांची में भी दिखा। अगस्त क्रांति की धमक पठार पर भी सुनी गई। छोटानागपुर व संताल परगना नौ अगस्त से लेकर 18 अगस्त धधकता रहा। रांची में नौ को हड़ताल रही। संध्या जिला कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में तालाबंदी कर दी गई। इसके बाद लोगों की सभा हुई, जिसमें काफी संख्या में छात्र-नौजवान भी शामिल हुए।

शहर के पुराने क्रांतिकारी रहे डॉ यदुगोपाल मुखर्जी कों पकड़ लिया गया। रामरक्षा उपाध्याय, नारायणजी, नंदकिशोर भगत, नागेश्वर प्रसाद भी गिरफ्तार कर लिए गए। दस को नारायण चंद्र लाहिड़ी भी पकड़ लिए गए। अतुल चंद्र मित्र को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस कलकत्ते पहुंची। अतुल बाबू वहां अपना इलाज करवा रहे थे। पुलिस की आंखों में धूल झोंक वे दस अगस्त की रात रांची पहुंचे ओर कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्हें अगस्त आंदोलन का कार्यक्रम बताया।

इस बीच पटना में गोलीकांड हो गया तो उसकी खबर रांची भी पहुंची। यहां छात्र काफी आवेश में आ गए और रांची जिला स्कूल के छात्रों ने स्थानीय विद्यालय में हड़ताल करवाई और शहर भर में जुलूस निकाला। सारे विद्यार्थी कचहरी हाते में जमा हुए और गोलीकांड की निंदा की। वहां से फिर जिला कांग्रेस कार्यालय आए, जहां पुलिस का ताला लगा हुआ था, लेकिन युवाओं की भीड़ ने ताला तोड़ दिया। पुलिस सामने थी पर कुछ न कर सकी। 13 अगस्त को लड़के जिला आफिस पहुंचे और अपनी कार्रवाई दुहरा रहे थे कि पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। एक दर्जन युवाओं को गिरफ्तार कर लिया गया। 14-15 अगस्त को रांची शहर में छात्रों ने जुलूस निकाला। 22 लोग गिरफ्तार किए गए।

17 अगस्त का दिन बड़ा उथल-पुथल का रहा। आगा खां पैलेस में महादेव देसाई के मरने की खबर पर जनता उग्र हो गई। लोग कहते घूमने लगे कि सरकार ने जहर देकर मार दिया है। सारे शहर में हड़ताल हो गई। हिंदू-मुसलमान का लंबा जुलूस निकला, जिसे तितर-बितर हो हाने का हुक्म एसडीओ ने दिया, पर जुलूस अपनी राह चलता रहा। नारेबाजी करता हुआ बढ़ता रहा। तब एसडीओ ने लाठी चार्ज का आदेश दिया, लेकिन पुलिस ने इनकार कर दिया। एक बार नहीं, तीन बार। पुलिस का रूख देख जुलूस शांत हो गया और एसडीओ से बोला कि नगर रक्षा समिति तक ही जाना है, आगे नही, लेकिन एसडीओ एक कदम भी आगे जाने देना नहीं चाहता था। इस दिन कई बड़े कांग्रेसी नेता पकड़े गए। मांडर, कुडू, चैनपुर, बेड़ो व बिशुनपुर के थानों पर झंडे फहराए गए। कुडू को छोड़कर बाकी सब जगह ताले लगा दिए गए।

अरगोड़ा रेलवे स्टेशन को जला दिया गया। रांची-लोहरदगा के बीच रेलवे लाइन को उखाड़ दिया गया। हिनू हवाई अड्डे, लोहरदगा का फौजी कैंप, रांची का पोस्ट आफिस और उस समय का ग्रीष्मकालीन सचिवालय में भी तोडफ़ोड़ की गई। तार काटने का काम कोकर गांव के हलके में किया गया। यानी, तब कोकर एक गांव ही था।

नामकुम में भी तोडफ़ोड़ किया गया। रांची में नौ अगस्त से 18 अगस्त के बीच 12 लोग नजरबंद किए गए थे, 349 की गिरफ्तारी हुई थी और 916 दंडित किए गए थे और जुर्माना करीब छह हजार वसूला गया था। लेकिन संताल परगना में 26 लोग मारे गए और पचास हजार जुर्माना वसूला गया था। पलामू में भी तीन सौ लोग दंडित किए गए थे और 1286 घायल। 3400 सामूहिक जुर्माना वसूला गया था। बड़े नेताओं को हजारीबाग जेल भेज दिया गया।

 

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