बेरोजगारी पर राजनीतिक प्रदर्शन



डॉ संतोष कुमार राय

विपक्ष और विरोध का बहुत घनिष्ट संबंध है। लेकिन कोई भी विरोध जब काल और परिस्थिति के अनुरूप होता है तो वह न सिर्फ बदलाव का द्योतक बनता है, बल्कि लोकतंत्र के इतिहास में उसे लम्बे समय तक याद भी किया जाता है। भारत की राजनीति में ऐसे अनेक विरोध प्रदर्शन हुए हैं जिनका नाम आज भी बड़े गर्व से लिया जाता है। आपातकाल का विरोध, बोफोर्स घोटाले का विरोध, चारा घोटाले का विरोध, टूजी स्पेक्ट्रम का विरोध, कोयला घोटाले का विरोध, कामनवेल्थ गेम घोटाले का विरोध जैसे अनेक विरोध प्रदर्शन भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हैं। ये विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक क्यों बने? इन्हेंं आज भी याद क्यों किया जाता है? जाहिर सी बात है ये ऐतिहासिक इसलिए बने क्योंकि ये सही समय और परिस्थिति में किया गये।

कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों द्वारा 17 सितंबर को विरोध प्रदर्शन का जो ताम-झाम बनाया गया क्या वह जन सामान्य की वास्तविक मनोदशा तक पहुंच पाया? क्या यह विरोध सच में बेरोजगारों के हित में था? क्या इसमे सामान्य जन ने उसी मनोभाव से भागीदारी की जिस मनोभाव से राजनीतिक दलों ने किया? क्या बिना जनता को विश्वास में लिए लोकतंत्र में कोई भी सफल विरोध प्रदर्शन संभव है?

इस संदर्भ में यह कहना गलत नहीं होगा कि बेरोजगारों के नाम जैसा सतही राजनीतिक प्रदर्शन कांग्रेस के साथ अन्य विपक्षी दलों ने किया उससे इनकी बेरोजगारों के प्रति सहानुभूति कम राजनीतिक लाचारी ज्यादा दिखी। विपक्ष यदि सरकार को वास्तविक मुद्दों के साथ घेरता है तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छी बात मानी जाती है लेकिन यदि जनता का विश्वास लिए बिना कोई राजनितिक दल जब विरोध करता है तो यह उसकी सत्ता की भूख होती है।

कांग्रेस की राजनीतिक समझ पिछले छह वर्षों में जैसी रही है वह भारतीय राजनीति की किसी भी विपक्षी पार्टी के रूप में बहुत हास्यास्पद रही है। यदि कांग्रेस द्वारा किये गए विरोध प्रदर्शनों पर ध्यान दिया जाय तो हमें ध्यान होगा कि राहुल गा?धी की सरकार के विरोधी में एक रैली उत्तर प्रदेश में हुई थी, जिसका विषय खाट (चारपाई) पर चर्चा रखा गया था। वह रैली जैसे ही खत्म हुई चारपायी लूटने वालों की भगदड़ मच गई। उसके बाद कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में क्या स्थिति हुई यह सभी को पता है। यहां तक कि कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी से भी राहुल गांधी चुनाव हार गए।


कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार का जिस तरह के मुद्दों के साथ विरोध किया वे हर मुद्दे पर फेल हुए हैं। जनता के मन के विपरीत कांग्रेस पार्टी ने विरोध के मुद्दे चुने जिसका परिणाम यह हुआ कि अब कांग्रेस और राहुल गांधी को कोई भी सीरियसली नहीं लेता लिहाजा कोई भी प्रतिरोधी आंदोलन सही रणनीति के अभाव प्रतिरोध का विषय नहीं बन पाया।

पिछले लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी जैसी भाषा और विषयों के साथ चुनाव में आए उसे जनता ने नकार दिया। दरअसल समूचा विपक्ष अभी तक यह नहीं समझ पाया है कि नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए किस तरह के विषय लाये जाय। जहां तक विपक्षी राजनीति का सवाल है तो वाही विपक्ष अधिक प्रासंगिक रहता है जो जनता के बीच से विषय लाता है अर्थात जनता के बीच से जो आवाज उठती है उसी को अपना समर्थन देता है, न सिर्फ समर्थन देता है बल्कि उसी के साथ खड़ा होता है।

इस समय जो विपक्ष है वह इसलिए सत्ता के सामने चूक जा रहा है क्योंकि दिनोदिन उसकी जनता से पकड़ ढीली होती जा रहा है। वह अपना मुद्दा जनता के बीच लेकर जा रहा है जिसे जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है इसीलिए विपक्षियों के सारे मुद्दे पिट जा रहे हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। बिहार चुनाव को देखते हुए विपक्ष ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगार दिवस की तरह मनाने का फैसला किया और वह भी सोशल मीडिया के माध्यम से। आज देशा और विश्व की जैसी स्थिति बनी हुई है उसमें सरकार का विरोध करना कहा? से उचित है। पूरा विश्व कोरोना से लड़ रहा है। भारत सरकार भी इस लड़ाई को पूरी सिद्दत से लड़ रही है। चीन की हर रणनीति का डटकर सामना कर रही है। न सिर्फ सामना कर रही है बल्कि उसकी हर चल पर उसे पीछे धकेल रही है। ऐसे में सरकार का विरोध कहीं से भी जायज नहीं था। आम जन ने इस लड़ाई में न के बराबर साथ दिया। सभी विपक्षी पाॢटयों ने कुछ छुटभैया कार्यकर्ताओं के माध्यम विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने का प्रयास किया लेकिन उसका कोई बहुत अधिक प्रभाव नहीं दिखा।

राहुल गांधी समेत समूचे विपक्ष को पहले जनता की वास्तविक समस्याओं से जुडऩा होगा। जनता के बीच रहना होगा, उनके जीवन को जीना होगा, तब कहीं जाकर विरोध का कुछ रास्ता बनेगा। विपक्ष अन्यथा ऐसे ही मुद्दे लेकर आता रहेगा और जनता उस नकारती रहेगी।

लेखक दिल्ली विवि में प्राध्यापक हैं। ये उनका निजी विचार है।

 

समाजनामा

///////////////////////////////////////////////////////////////////////