क्रांतिकारियों के उपेक्षित वंशज



ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव

200 वर्षों तक निरंतर जूंझ कर राष्ट्र भक्तों की पीढ़ियां जो कश्ती निकाल लाई थी, आज वह नदी के किन लहरों पर है? उस कश्ती पर सवार कौन है? या किस घाट वह बंधी है? सच बड़ा कटु और मार्मिक है। आजादी के परवानों के वंशज, रिश्ते- नाते कहां और किन हालात में है ? अगर 73 वर्षों पूर्व कि आज हमारे रक्त में मद्दिम नहीं हुई होती, तो हमें पता होता कि 1857 के महासंग्राम में आजादी के परवानों के खिलाफ जिन लोगों ने अंग्रेजों का साथ दिया , जिन्होंने 1942 में गांधी के कार्यकर्ताओं की पीठ लाठी बरसाये, उनके वंशज राजसत्ता को सुशोभित कर रहे हैं? जिन्हें आजादी के लिए कुर्बानी देने के कारण अपमान ,लांछना और तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिला , आजाद भारत में भी उनके वंशज गुमनाम, उपेक्षित और रंक है । झांसी की रानी के गोद लिए बेटे का सागा नाती कुछ वर्षों तक डाक तार विभाग में मामूली नौकरी करता था । कानपुर के नवाब आजम अली खान के 57 में करोड़ों की संपत्ति गई परिवार के दर्जनों लोग मार डाले गए, पर आज उनके वंशज कहां है ? नाना साहब का बिठूर बदहाल है । तांत्या तोपे का वंशज दाने-दाने को मोहताज है। बाबू कुंवर सिंह का स्मारक उपेक्षित है । काशी में लक्ष्मी बाई का जन्म स्थल कुड़खाना बन गया है। फैजाबाद के बहादुर मौलवी अहमदशाह किसे याद है?

अजीमुल्ला खॉ, पीर अली , लक्ष्मीबाई की सखी मंदार रानी लक्ष्मीबाई को बचाने में मारी गई, रामचंद्र देशमुख, जिन्होंने रानी के शव का दाह संस्कार किया, रानी के तोपखाने के गौस खा के वंशज और सगे संबंधी कहां है और किस हालात में है ? बहादुर नवाब बांदा का उत्तराधिकारी भोपाल की किस मिल नौकरी करता है। झारखंड की धरती के पौरूष और सम्मान के पर्याय बहादुर ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ,शेख भिखारी, टिकैत उमराव सिंह, जग्गू दीवान के वंशज छोटानागपुर की धरती पर दुर्दिन में है। जगदीशपुर के हरिकिशुन सिंह, जो अकेले वर्षों तक अंग्रेजों के भय आतंक के कारण बने रहे । सासाराम के गौरवनिशांन सिंह, जिनकी रंगों में कुंवर सिंह की तरह चौथे पन में जवानी का खून कुलांचे मारता था , आज अपरिचित क्यों बन गए हैं? अनेक गुमनाम शहीद हुए , पर आज इतिहास के पन्नों या अतीत के गर्भ में क्यों चले गए ? क्यों हम मुर्दा और निष्प्राण लोगों को आज भी पूज रहे हैं । राय बहादुरों, सरों और सामंतों की संतानों को ?

15 अगस्त 1952 ईस्वी का वह दिन विस्मरणीय है जब पूरे रांची के घर-घर , गली-गली, विद्यालयों , सरकारी भवनों में उल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रीय गान का उद्घोष सर्वत्र फैल गया । लोग बाग ने भारतीय स्वतंत्रता का आनंद लिया और उन हुतात्माओं , जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया ।

इस स्वतंत्रता का विशेष आनंद अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का परिवार को मिला, जिनके साथ अंग्रेजी सरकार ने जुल्म, अत्याचार, शोषण, अन्याय किया था । भारत स्वतंत्र हुआ, अब अमर सेनानियों को न्याय अपनी सरकार से प्राप्त हो जाएगा , अब गर्व करने का दिन आ गया है।

मोराबादी मैदान में बिहार प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने ध्वज नहीं फहराकर बिहार राज्य के राजधानी पटना के गांधी मैदान में राष्ट्रध्वज फहराया गया। मोराबादी मैदान में भी ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न हुआ।देश को आजादी मिली, प्रजातंत्र की स्थापना हो गई । लोग बाग में हर्षोल्लास था ।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्राचीन लाल किले के प्राचीर में ध्वजारोहण किया और देश को समृद्ध साली बनाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञा किया गया । उसी काल में भारत को औद्योगिक समृद्धि प्रदान कराने हेतु प्रयास की गई , जिसका परिणाम स्वरुप निर्णय आया कि झारखंड में औद्योगिक जननी के रूप में भारी अभियंत्रण निगम की स्थापना हेतु जगह रांची का चयन हुआ। इसके स्थापना हेतु भूमि अधिग्रहण की योजना को कार्य रूप दिया गया।


बड़कागढ़ ईस्टेट अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की भूमि को एचईसी स्थापना के लिए मुफ्त में बिहार सरकार दे दी , शहीद का वंशज स्वतंत्रता का आनंद ले ही रहा था कि शहीद के जमीन को छीन ली गई । एचईसी स्थापना हेतु 32 ग्रामों की भूमि का अधिग्रहण की योजना बनकर अधिग्रहण कार्य को तेज गति दी गई ।यहां के ग्रामों के आदिवासियों , सदानों ने मुआवजा , नौकरी, व्यवसाय को निश्चित कराने के लिए संगठन बनाकर आंदोलनरत्त हो गए ।

ग्रामों के जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन और भारी अभियंत्रण निगम के वरिष्ठ अधिकारी, मि0 साण्डिलया के साथ स्वीकृति हुआ और उद्योग का निर्माण प्रारंभ हो गया ।
नगर विभाग हेतु अलग से जमीन अधिग्रहण हुआ, तो कारखाना के लिए अलग से , डैम के लिए अलग से भूमि अधिग्रहण किया गया, साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अलग से जमीन अधिग्रहण किया गया, व रेलवे के लिए भी भूमि अधिग्रहण किया गया साथ ही हवाई अड्डा हेतु भी विस्तारीकरण के लिए भूमि ली गई। ग्रामों के ग्रामीणों के पुनर्वास हेतु भी विभिन्न जगहों पर भूमि अधिग्रहण कर पुनर्वास की गई । उसी समय से रांची का कायाकल्प हुआ।


देश की आजादी की 73वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं, आजादी के बाद कितना विकास हो सका यहां के लोग बाग को कितना अधिकार मिला स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार को उनका हक दिया गया या नहीं यह आज भी प्रश्न चिन्ह उत्पन्न करता है विस्थापितों को उनका हक अधिकार से मुक्त रखा गया या दिया गया । विस्थापित ग्रामों में जाकर अन्यवेशन किया जा सकता है। शिक्षा के क्षेत्रों का विस्तार उन प्रदेशों में अधिकतर हुआ, जहां के लोग थोड़ा बहुत जागरूक थे । भारत की नियति, युद्ध में ही ज्यादा समय रहने के कारण भी भारतीय स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य का विलोपन होकर रह गया ।
खैर देश की आजादी हुई ,मिली इसे संभालने और भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर होना है, धर्मनिपेक्षता को मिटने नहीं देना भी राष्ट्र हित में होगा आदि ।

जब भारी अभियंत्रण निगम लिमिटेड की स्थापना रांची में कर दी गई , और प्रथम चेयरमैन के रूप में श्री नागराज राव प्रतिस्थापित हुए । उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस मातृ उद्योग को राष्ट्र को समर्पित किया । उस समय यह घोषणा की गई कि यहां की भूमि पुत्रों को नौकरी , रोजगार दिया जाएगा । जो अनस्किल्ड लेबर हैं उन्हें ट्रेनिंग देकर स्किल्ड बनाया जाएगा , इसके लिए इंस्टिट्यूट सी.टी.आई की स्थापना हुई।

प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को हमारा देश , हमारा राज्य बड़ी धूमधाम से मनाता है । स्वतंत्रता की अनूभूति आज के लोग बाग में जोर शोर से देखने को मिलता है।

अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के ऐतिहासिक निवास बड़कागढ़ जगन्नाथपुर में ध्वजारोहण होता रहा है, इसी क्रम में बड़कागढ़ की राजधानी हटिया में स्थापित शहादत स्मारक स्तंभ के प्रांगण में राष्ट्रीय ध्वजारोहण उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है । रांची स्थित शहीद चौक देश की आजादी का वह शहीद चीन है जिसे हम चाह कर भी नहीं भूला सकते । वहां पर भी राष्ट्रीय ध्वजारोहन किया जाता रहा है ।

लेखक अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव अध्ययन केंद्र के सचिव हैं।

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