अशोक के पौधे

एन के झा

सुबह सुबह मयंक घर के बगीचे में बैठ गए। हल्की ढंढी प्यार चल रही थी। सर्दी का मौसम विदा होने को था। यह वसंत के आगमन की सूचना थी।

मंच पर उतरी कहानियां



अनिता रश्मि

जीवन एक नाटक ही तो है। उसे कहानियों में रचता है कथाकार। और उन कथाओं में से कुछेक को नाटक में ढाल दिया है कलमकार कुमार संजय ने। नाटक लिखना इतना भी आसान नहीं। सब कुछ चंद दृश्यों, संवादों और चंद क्रियाकलापों से प्रकट कर देना होता

भारत की महागाथा : एकदा भारतवर्षे



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वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा की अभी-अभी एक किताब आई है-'एकदा भारतवर्षेÓ। इसके पूर्व आपने अमृतलाल नागर की पौराणिक उपन्यास एकदा नैमिषारण्ये आपने पढ़ी होगी। यहां समानता पर शीर्षक को लेकर है...। नागर नैमिषारण्य की कथा कहते हैं। उनके एक कालखंड विशेष है। इसमें काल का प्रवाह है। इस प्रवाह में भारत की चार-पांच हजार साल की कहानी है।

अखंड भारत के शिल्पकार : पटेल



संजय कृष्ण

हमारे देश के इतिहासकारों ने पटेल पर बहुत कम शब्द खर्च किए। पटेल के साथ न समाज ने न्याय किया और न उस कांग्रेस ने, जिसके लिए उनका कतरा-कतरा चला गया। देश और समाज के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को भले हम लौह पुरुष जैसे शब्दों से विभूषित करें, लेकिन जरूरी सवाल यह है कि क्या हम उनके काम, उनके ...

अखंड भारत के शिल्पकार : पटेल



संजय कृष्ण

हमारे देश के इतिहासकारों ने पटेल पर बहुत कम शब्द खर्च किए। पटेल के साथ न समाज ने न्याय किया और न उस कांग्रेस ने, जिसके लिए उनका कतरा-कतरा चला गया। देश और समाज के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को भले हम लौह पुरुष जैसे शब्दों से विभूषित करें, लेकिन जरूरी सवाल यह है कि क्या हम उनके काम, उनके ...

आशुतोष राणा का रामराज्य



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महर्षि वाल्मीकि से लेकर कबीर, बाबा तुलसी, केशवदास, निराला और कुबेरनाथ राय, पं विद्यानिवास मिश्र, नरेंद्र्र कोहली, तक न जाने कितने लोगों ने राम का चरित लिखा है। बौद्ध और जैन से लेकर दक्षिण, पश्चिम, असम और पूर्वोत्तर में भी रामकथा की परंपरा मिलती है।

आलोचकों की दृष्टि में छायावाद



सुरेश कुमार

सन् 1920 के दौर हिन्दी साहित्य में काफी उथल-पथल भरा रहा हैं।एक ओर राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता का उदय हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ सुधारवादी दृष्टिकोण भी विकसित हुआ। इसका कारण यह था कि हिन्दी साहित्य में सन् 1920 के बाद ‘माधुरी’,‘चांद’,‘सुधा’, मनोरमा, ‘विश्वमित्र’ और विशाल भारत’ जैसी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं का जन्म हो चुका था ।
 

आदिवासी साहित्य