झारखंडी किताबों का झरोखा



चौराहा.इन

झारखंड पर वैसे तो देश भर के प्रकाशकों ने विभिन्न लेखकों की किताबें प्रकाशित की हैं और कर रहे हैं, लेकिन रांची में एक ऐसा स्थान है, जहां पर झारखंड पर लिखी करीब सौ से अधिक पुस्तकें मिल जाएंगी। जी हां, बात कर रहे हैं प्रभात प्रकाशन की। रांची रेलवे स्टेशन रोड पर भव्य शोरूम है, जहां झारखंड से बहुत सारे लेखकों की झारखंड पर लिखी पुस्तकें सुलभ हैं।

यहां वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश की झारखंड पर लिखी कई किताबें हैं। उसी क्रम में पद्मश्री बलबीर दत्त, अनुज कुमार सिन्हा, अश्विनी कुमार पंकज, वंदना टेटे, संजय कृष्ण, सरयू राय, सपना मिश्र, संजय झा, अनिता रंजन, अनिल अनुज, आइएएस मनीष रंजन, फैसल अनुराग, घनश्याम, प्रभाकर तिर्की, विक्रमादित्य प्रसाद, सुनील मिंज, हेमंत, शिशिर टुडू, डॉ मयंक मुरारी, संतोष किडो आदि। लोकप्रिय आदिवासी कविताएं, झारखंड के मेले, झारखंड के पर्व-त्योहार, 1855 के हूल पर ऐसे हुआ हूल, एक डीएम की डायरी, बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा, धौनी, पंचायती राज, पत्रकारिता बिहार से झारखंड से बिहार, टाना भगत, प्रमुख खिलाड़ी, झारखंडी साहित्यकार, महात्मा गांधी और झारखंड से लेकर कई किताबें यहां देख सकते हैं। छात्रों के लिए कई प्रतियोगी पुस्तकें और पत्रिकाएं भी हैं।

छह दशकों का सफर
प्रभात प्रकाशन पिछले छह दशकों से प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय है। पांच हजार से अधिक पुस्तकें यहां से प्रकाशित हो चुकी हैं। ओशियन बुक्स के माध्यम से अंग्रेजी में श्रेष्ठ पुस्तकें देख सकते हैं। प्रभात पेपरबैक्स के माध्यम से लेाकप्रिय पुस्तकें सस्ते दामों में प्रकाशित होती हैं।

दुर्लभ पुस्तकें भी
यहां कई दुर्लभ पुस्तकों का पुनर्मुद्रण भी है। इनमें एक पत्रिका है-महावीर। पटना से निकलती थी। इसका सत्याग्रह अंक 1932 में आया था। उसका दुबारा प्रकाशन हुआ। यह झारखंड और बिहार के सत्याग्रहियों के बारे में जानकारी देती है। जिलेवार आंदोलन पर रपट भी। इसी तरह हिंदी के पहले जासूसी कथाकार गोपालराम गहमरी की जासूसी कहानियां भी सौ साल बाद यहां से प्रकाशित हुई हैं। इसी तरह ऐसा हुआ हूल को याद कर सकते हैं, जो 1855 के हूल पर आधारित है। इसे श्ििाशर टुडू ने हिंदी में अनुवाद किया है। बलबीर दत्त की जयपाल सिंह मुंडा और इमरजेंसी पर पुस्तक है। संतोष किड़ो ने जयपाल सिंह पर अंग्रेजी में लिखी पुस्तक भी यहां है। शोरूम के संचालक राजेश शर्मा ने बताया कि अभी और भी पुस्तकें पाइप लाइन में हैं। हमारा उद्देश्य यहां के लेखकों को एक मंच देना और उनकी पुस्तकों को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। अभी तक सौ से अधिक पुस्तकें हम प्रकाशित कर चुके हैं।

संपर्क : रेलवे स्टेशन रोड, रांची। मो 8877337777

 

आदिवासी साहित्य
राजनामा