साहित्य, संगीत, कला की देवी



विजय केशरी

ज्ञान, कला और स्वर की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती की आराधना से ज्ञान की वृद्धि होती है। माता सरस्वती ज्ञान, कला और स्वर की प्रमुख देवी है। मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी माता सरस्वती की आराधना और उनकी कृपा से ज्ञानी बन सकता है। माघ बसंत पंचमी को पूजित होने वाली देवी माता सरस्वती नवदुर्गा का ही एक रूप है ।

दुनिया में फैलाया क्रिया योग: परमहंस योगानंद



Chauraha.in

आज (5जनवरी)परमहंस योगानंद की जयंती है। उन्होंने पूरी दुनिया में क्रिया योग को फैलाया। खासकर, अमेरिका में स्थापित अपने आश्रम से लोगों को इस योग से परिचित कराया। अमेरिका में ही उनका निधन हुआ। इसका उन्हें पूर्वाभास भी हो गया था। ऐसे योगी थे, जिनके चेहरे पर मुस्कान मृत्यु के बाद भी बनी रही। उनके बाल काले ही रहे।

1.५ लाख साबुन वितरित करेगा यूनिसेफ



चौराहा. इन । नवंबर, 2020।

हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड (एचयूएल) ने यूनिसेफ के साथ अपनी वैश्विक साझेदारी के तहत झारखंड में झुग्गी व ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं आंगनवाड़ी कर्मचारियों को लगभग 1.5 लाख साबुन बांटे। ये साबुन सरकार को कोविड-19 से लड़ने में मदद करने के लिए निशुल्क वितरित किए गए।

आदि काल से हो रही है सूर्य की पूजा



संजय कृष्ण

लोक आस्था का पर्व छठ सूर्य की उपासना का ही पर्व है। यहां 4 दिनों तक मनने वाला पर्व पहले डूबते सूर्य को जल अर्पित करता है फिर उगते। यह सबसे महत्वपूर्ण है। दूसरा, इसमें कोई कर्मकांड नहीं। इसलिए किसी ब्राह्मण की भी जरूरत नहीं। नए अन्न ही भगवान को समर्पित किया जाता है।

संस्कृत के श्लोकों से सजा है जगन्नाथ मंदिर



अनिता रश्मि

झारखण्ड की राजधानी राँची के बड़कागढ़ में पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तरह एक भव्य, विशाल, अति ख़ूबसूरत मंदिर है। इसमें जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम के विग्रह की पूजा होती है। ये विग्रह मिट्टी, पत्थर से नहीं, लकड़ी से निर्मित हैं।

धनतेरस : क्या है महत्व



स्वामी विमलेश

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन
भगवान धनवन्तरि अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है।

खेतों में हरियाली, चेहरे पर लाली



Chauraha.in, 17 oct

कोरोना काल में अर्थव्यवथा की अटकती सांसों और बेपटरी जीवन को पटरी पर लाने की जद्दोजहद के बीच कुछ खबरें सुकून देती हैं। ऐसी ही एक खबर गुमला प्रखंड के फोरी जुंगा टोली की है। 45 साल की सरोज मिंज इस निराशा के वातावरण से उबरकर अपने जीवन की ऐसी कहानी लिखी हैं, जिनसे अब लोग प्रेरणा ले रहे हैं।
 

शहरनामा
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