मलमास में क्या करें क्या न करें



स्वामी विमलेश

मलमास 18 सितंबर 2020 से आरंभ हो रहे हैं। मलमास को अधिक मास, पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धर्म कर्म की दृष्टि से मलमास का विशेष महत्व है। मलमास में किन कार्यों को नहीं करना चाहिए, आइए जानते हैं।

दुर्गाबाटी में पहले दी जाती थी बलि



रांची में दुर्गापूजा की शुरुआत रातू राज घराने से हुई। कहा जाता कै कि 1870 में दुर्गा पूजा यहां प्रारंभ हुई। रांची का यह प्रथम दुर्गोत्सव था। रातू किले के मुख्य द्वार से थोड़ा हटकर यहां मां का मंदिर है। किले के भीतर बलि स्थान भी है। यह राजा का उत्सव था। राजा का मंदिर था। लेकिन आम जनों ने इसके 13 साल बाद श्री श्री हरिसभा और दुर्गाबाटी संस्था ...

पत्थरों का पारखी : बुलू इमाम



प्रमोद कुमार झा

झारखंड भारत का एक अनुपम राज्य है। देश के इस भू भाग में प्रकृति ने सब कुछ उन्मुक्त भाव से प्रदान किया है। खनिज सम्पदाएँ यहां प्रचुर मात्रा में तो हैं ही ,यहां सैकड़ों प्रकार के दुर्लभ औषधीय पेड़,पौधे और बनस्पतियाँ भी उपलब्ध हैं। अगर मानव जाति की उत्पत्ति से लेकर अब तक के विकास यात्रा का गहन अध्ययन किया जाय तो इसके विस्तृत अध्ययन में झारखंड ...

देश का सबसे बड़ा शवागर


झारखंड राज्य में बुंडू प्रखंड के अंतर्गत चोकाहातू नामक गांव काफी समय से चर्चा में रहा है जिसका कारण वहां पाए जा रहे लगभग 7623 मेगालिथ्स हैं। चोकाहातू रांची से लगभग 70 किलोमीटर दूरी पर अवस्थित है। इसका सबसे पहला ऐतिहासिक संदर्भ 1871 में छोटा नागपुर के तत्कालीन कमिश्नर इ.टी. डाल्टन ने अपने यात्रा विवरण में दिया है जो एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल में प्रकाशित भी हुआ था।

पहले आदिवासी नायक लूथर तिग्गा का निधन



इतिहास कुछ ही लोगों को उनके काम के चलते लीजेंड बना देता है। झारखंड में लगभग गुमनाम हो चुके लूथर तिग्गा वैसे लोगों में से एक हैं जिनको इतिहास ने जीते जी लीजेंड बना दिया है। आज से 62 साल पहले जब उन्होंने ऋत्विक घटक की बांग्ला फिल्म ‘अजांत्रिक’ (1958) में अभिनय किया था।

झारखंड में श्रीरामोपासना


]झारखंड क्षेत्र भूगर्भिक संरचना के दृष्टिकोण से अति प्राचीन भू-भाग है। आरम्भ से अब तक यह क्षेत्र कई नामों से जाना जाता है। वैदिक काल के ऐतरेय ब्राह्मण में झारखंड क्षेत्र को पुण्ड्र कहा गया है, महाभारत काल में पुंडरीक और अर्कखंड व कर्कखंड, नागवंश काल में हीरानागपुर, सोनानागपुर, सुतियानागपुर व चुटियानागपुर मुगल काल में कोकराह, खोखरा, खुखरा व झारखंड, ब्रिटिश काल में छोटानागपुर एवं स्वतंत्र्योत्तर काल में झारखंड व ...

यहां काली गाय के दूध से होता है अभिषेक

खूंटी जिले तोरपा एक प्रखंड है। इसी प्रखंड का एक गांव है सिंड़ीग। फटका पंचायत के सिंड़ीग गांव में यह मंदिर दो नदियों बनई व कारो नदी के संगम पर है। इसलिए इसकी सुंदरता भी देखते बनती है। पूरा परिवेश प्राकृतिक है। सावन में तो चारों तरफ हरियाली ही नजर आती है। इस गांव के नाम से जाहिर है, यह शिव से संबंधित हैं। यहीं पर महादेव का एक परम ...
 

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