खेतों में हरियाली, चेहरे पर लाली



Chauraha.in 17 oct
कोरोना काल में अर्थव्यवथा की अटकती सांसों और बेपटरी जीवन को पटरी पर लाने की जद्दोजहद के बीच कुछ खबरें सुकून देती हैं। ऐसी ही एक खबर गुमला प्रखंड के फोरी जुंगा टोली की है। 45 साल की सरोज मिंज इस निराशा के वातावरण से उबरकर अपने जीवन की ऐसी कहानी लिखी हैं, जिनसे अब लोग प्रेरणा ले रहे हैं। टमाटर की खेती से उनके चेहरे की लाली लौट आई है। तीस डिसमिल जमीन से टमाटर की खेती कर 25000 रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया है। सरोज अकेली महिला नहीं हैं। उनके गांव की ललिता देवी, प्रिसका देवी और बिनीता सहित क्षेत्र की सैंकड़ों महिलाएं आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं।

सरोज कहती हैं कि पहले खेती करती थी, लेकिन खाने भर का ही होता है। अब प्रदान ने तकनीकी सहयोग के साथ बाजार आदि के बारे में जानकारी देकर हम लोगों को समृद्ध बनाया है। टमाटर की अच्छी खेती हुई है। अभी तीस डिसमिल में बंदा गोभी लगा है और मटर भी। सरोज कहती हैं कि जब सारा देश लाकडाउन से प्रभावित घर में बैठा था, प्रदान झारखंड के कई सुदूर गांवों की महिलाओं को आजीविका संवर्धन और गरीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित कर रहा था। यह सब शारीरिक दूरी का पालन करते-कराते हुए संभव किया जा रहा था। बीते जुलाई-अगस्त महीने में रबी फसल की योजना बनी। खाद-बीज, दवा आदि के लिए प्रदान के सहयोग से गुमला एवं रायडीह ब्लाक की महिला किसानों ने गुमला महिला किसान स्वाबलंबन ट्रस्ट की शुरुआत की।

अभी 1120 महिला किसानों ने मिलकर 'महिला किसान उत्पादक समितिÓ बनाई है। इस समिति में जुंगा टोली, खोरा जामटोली, बीरकेरा, सीलम, बरटोली, सुरसांग, बरवाटोली, अरिंग टोली की महिलाएं शामिल हैं। समिति से जुड़ी प्रत्येक महिला किसान को कुल 90 डिसमिल में खेती करने के पूरा सहयोग किया गया। सामूहिक नर्सरी/बिचड़ा उत्पादन, खाद, दवा, तकनीकी जानकारी, बाजार की व्यवस्था, खेत में जाकर फसल एवं उपज का मूल्यांकन और रोग-बीमारी में सहयोग आदि प्रदान संस्था ने मुहैया कराई। प्रदान के राहुल पाठक ने बताया कि एक साथ बिचड़ा लगाना एवं एक साथ फसलों की रोपाई करने से एक समय में उपज होने से बाजार व्यवस्था संभव हो पाई। उत्पादित टमाटर को महिला किसान समिति गुमला, बोकारो, रांची एवं कोलकाता की मंडियों में भेज रही है। इसका जो मुनाफा होता है, वह सीधे महिला किसान खाते में जाता है। टमाटर के उचित बाजार मिलने से प्रति किलो किसान को 20 -25 रुपये का थोक भाव मिल रहा है, इससे टमाटर करने वाले परिवार आसानी से 25-30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस काम में जिला उद्यान कार्यालय का भी सहयोग रहा। उद्यान विभाग ने किसानों को नेट शेड, प्रो ट्रे, रिंग शेड प्रदान किया। इसका लाभ भी मिला। खोरा जामटोली के विश्वनाथ उरांव कहते हैं कि महिला समिति से 12 हजार का ऋण लेकर टमाटर लगाया है। करीब 25 हजार का मुनाफा हुआ है। पहले खेती करते थे तो किसी तरह गुजर-बसर होता था, लेकिन अब बाजार को ध्यान में रखकर खेती कर रहे हैं। पत्नी भी साथ देती है। तकनीकी सहयोग प्रदान करता रहता है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह संयुक्त प्रयास बैंक आफ अमेरिका मैरिल लिंच एवं वालमार्ट फाउंडेशन के सहयोग से प्रदान जमीन पर उतार रहा है।

 

शहरनामा