यहां काली गाय के दूध से होता है अभिषेक




खूंटी जिले तोरपा एक प्रखंड है। इसी प्रखंड का एक गांव है सिंड़ीग। फटका पंचायत के सिंड़ीग गांव में यह मंदिर दो नदियों बनई व कारो नदी के संगम पर है। इसलिए इसकी सुंदरता भी देखते बनती है। पूरा परिवेश प्राकृतिक है। सावन में तो चारों तरफ हरियाली ही नजर आती है। इस गांव के नाम से जाहिर है, यह शिव से संबंधित हैं। यहीं पर महादेव का एक परम पावन स्थान है। आसपास के लोग सैकड़ों सालों से यहां पूजा करते आ रहे हैं। महाशिवरात्रि पर यहां मेले का भी आयोजन होता है।
अभिषेक के बाद होती है बारिश
पुराने लोग बताते हैं कि शिवलिंग आदिकाल से है। इस जगह को लेकर ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ माह में जब तक कोई काली गाय के दूध से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करता, तब तक बारिश नहीं होती। अभिषेक होते ही जोरदार बारिश होने लगती थी।
शिवलिंग की हो गई थी चोरी
इस शिवलिंग को लेकर एक और कथा प्रचलित है। सालों पहले पश्चिमी सिंहभूम के खंडा गांव का कोई पहान इस शिवलिंग को लेकर चला गया था। कुछ कहते हैं, चुराकर ले गया था। कुछ कहते हैं, आस्था के कारण। यहां से जब शिवलिंग चला गया तो गांव के आसपास के लोग परेशान होने लगे। तरह-तरह की विपत्तियां आने लगीं। बीमारियों से भी गांव के लोग परेशान और विचलित होने लगे। बारिश ने भी गांव से मुंह मोड़ लिया। सूखाड़ व अकाल से किसान और गांव वाले परेशान होने लगे। जब पता चला कि यहां का शिवलिंग खंडा गांव चला गया है तो यहां के ग्रामीण उस गांव में जाकर शिवलिंग को वापस लेकर आए। इसके बाद तपकरा के पुरोहित ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ कर पुन: स्थापित किया। इस मौके पर रुद्राभिषेक भी किया गया।
मंदिर के मिलते हैं अवशेष
मंदिर अब खंडित है। यहां उसके अवशेष को देखा जा सकता है। अभी तक न पर्यटन विभाग ने इस इलाके का दौरा किया न पुरातत्व विभाग ने। दो नदियों के संगम पर होने के कारण इलाका बड़ा मनोरम है। जहां शिवलिंग के अलावे एक जोड़ी नंदी, हल, चौखट में देवी- देवताओं की प्रतिमाएं मिलती हैं। यहां पर खुदाई हो तो बहुत कुछ पता चल सकेगा। कई राज खुल सकते हैं।

 

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