रांची डिस्टलरी : पहला कारखाना

Johar लालपुर चौक राजधानी रांची के व्यस्तम चौराहों में एक है। यही से एक सड़क कोकर की ओर जाती है। डिस्टलरी पुल से ठीक पहले बाईं ओर स्थित है झारखंड का पहला कारखाना। यह कारखाना वर्षों से बंद है, पर आज भी इसी के नाम से क्षेत्र जाना जाता है। रांची डिस्टलरी रांची का पहला संगठित उद्योग है। यहाँ इटालियन तकनीक से स्प्रिट बनाने का संयंत्र था, जो कि शराब बनाने ...

टैगोर हिल : जहां रहते थे रवींद्र के बड़े भाई

Johar टैगोर हिल के शिखर पर खुले मंडप के इस ब्रह्म मंदिर में जैसे आज भी कोई ध्यान मुद्रा में बैठा हो। चिर शांति। ध्यान मग्न पहाड़। शांत-चित्त लताएं, पेड़, पौधे। सैकड़ों सीढिय़ां चढऩे के बाद इस एहसास से आप अलग नहीं हो सकते। सीढिय़ों के दाए-बाएं शिलाखंड, पेड़, पौधे, पत्तियां जैसे आज भी अपनी कहानी सुनाने को बेताब हों कि वह व्यक्ति कहां-कहां टहलता रहा। पेड़-पौधों और शिलाओं से कैसे ...

झारखंड का अलौकि‍क गॉंव 'मलूटी'

Johar देवघर से तारापीठ जा रही थी दर्शन के लि‍ए। जब दुमका से आगे गई तो रास्‍ते में माईलस्‍टोन पर लि‍खा मि‍ला - मलूटी 55 कि‍लोमीटर। अब ये कैसे हो सकता था कि‍ उस रास्‍ते से गुजरूं और उस गांव में न जाऊं जि‍सके बारे में इतना सुन रखा है कि‍ मंदि‍रों का गांव है यह। मेरी उत्‍सुकता चरम पर और नजरें सड़क के दि‍शा-नि‍र्देश पर।

चलता-फिरता अजायबघर

Johar झारखंड एक चलता-फिरता अजायबघर है। नाना प्रकार की वनस्पतियां, आदिम जनजातियां, उनके नृत्य, गीत और संस्कृति यहां हर आने वाले को आकर्षित करते हैं। उसी तरह, यहां के जंगल में भी पुकारते हैं। कल-कल करते झरने भी अपने मधुर संगीत से आने वालों को मुग्ध करते हैं। झारखंड की धरती कुछ ऐसी ही है, जहां आने पर मन खुद ब खुद मचलने लगता है और पैर स्वत: थिरकने लगते हैं। ...
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