गाड़ी लोहरदगा मेल

Johar

अब गाड़ी लोहरदगा मेल की यादें शेष हैं। यह पहली गाड़ी है, जिस पर वृत्तचित्र बना और देश भर में सराहा गया और पुरस्कृत भी किया। इसकी कहानी भी अजीब है।

रांची में पहली बार यह ट्रेन 1907 में नैरो गेज पर चली थी, जो रांची से पुरुलिया तक गई थी। 1911 में इसका विस्तार करते हुए रांची से लोहरदगा तक कर दिया गया। यह ट्रेन रांची और लोहरदगा के बीच दिन में एक बार चलती थी। सुबह यह ट्रेन रांची से लोहरदगा जाती और वहां से उसी दिन शाम को वापस आ जाती थी। बाद में इसे दोनों ओर से शुरू किया गया। एक सुबह रांची से खुलती थी और दूसरी लोहरदगा से और फिर दोनों उसी दिन शाम को वापस हो जाती थी। यह ट्रेन रांची और लोहरदगा के बीच लाइफलाइन मानी जाती थी।

पर्यटकों को पसंद थी यह ट्रेन

रांची और लोहरदगा के बीच नैरो गेज की इस ट्रेन में कोयले का इंजन लगा हुआ था। यह ट्रेन जब चलती थी तो इसे देखने के लिए लोग इसके नजदीक आ जाते थे। उस वक्त इस ट्रेन में सफर करना बहुत ही रोमांचकारी हुआ करता था। खासकर छोटानागपुर के दौरे पर आनेवाले इंग्लिश ऑफिसर्स तो इस ट्रेन को लेकर काफी उत्साहित हुआ करते थे। उनके लिए इस ट्रेन की बोगी में स्पेशल अरेजमेंट किया जाता था। इसके अलावा पर्यटक भी इस टे्रन से यात्रा करना पसंद करते थे।

बिजनेस से था कनेक्शन

रांची लोहरदगा ट्रेन से लोहरदगा से बड़ी संख्या में लोग रांची आते थे। यह ट्रेन सुबह 10 बजे रांची रेलवे स्टेशन पहुंच जाती थी। दिनभर वे लोग रांची रहकर अपना बिजनेस करते थे और शाम को लोहरदगा लौट जाते थे। रांची में ट्रेन की शुरुआत कैसे हुई, इस पर श्रवण कुमार गोस्वामी ने छोटी लाइन से बड़ी कहानी नाम से एक चैप्टर लिखा है, जो उनकी बुक रांची तब और अब में है।

हेरिटेज बनते-बनते रह गई

रांची-लोहरदगा छोटी लाइन को हेरिटेज में शामिल करने की बात चल ही रही थी कि 2004 में यहां पर नैरो गेज को मीटर गेज में कनवर्ट कर दिया गया और नैरो गेज ट्रेन का चलना बंद हो गया। मेघनाथ बनाया ट्रेन पर वृत्तचित्र

इस ट्रेन का झारखंड, रांची और लोहरदगा के लिए बड़ा महत्व था। कैसे यह ट्रेन यहां की लाइफस्टाइल में शामिल थी, इसे दिखाने के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर मेघनाथ और बीजू टोप्पो ने 'गाड़ी लोहरदगा मेलÓ नाम से डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई। इसे रांची-लोहरदगा नैरो गेज ट्रेन के अंदर ही फिल्माया गया था। इसमें जानेमाने संस्कृतिकर्मी दिवंगत डा. रामदयाल मुंडा ने संगीत दिया था और अभिनय भी किया। मधू मंसूरी ने अपनी आवाज दी।