कोरोना का डर पहुंचा रहा पर्यावरण फायदा

Johar

डॉ. नितीश प्रियदर्शी

पर्यावरणविद एवं असिस्टेंट प्रोफेसर भूगर्भ विज्ञानं विभाग, रांची विश्वविद्यालय।


24 मार्च से भारत में लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण देश के कई हिस्सों में भी इंसानी गतिविधियों की रफ्तार थमी है और इस दौरान प्रकृति अपनी मरम्मत खुद करती नजर आ रही है। गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगने और ज्यादातर कारखानें बंद होने के बाद दुनिया समेत देश के कई शहरों की हवा की क्वालिटी में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। रांची में भी इस लॉक डाउन का प्रभाव दिखा रहा है। इन दिनों कोरोना की तमाम त्रासदियों से जूझते रांची शहर के लोग सुबह-शाम की हवा में एक नयी ताजगी महसूस करने लगे हैं। जिन लोगों के घरों के आसपास कुछ हरियाली बची है वहां अब परिंदों का कलरव ज्यादा साफ़ सुना जा रहा है।

रांची के कुछ जगहों में मोर देखे जाने की भी सूचना है। रूक रूक के बारिश भी हो रही है। लोग एयर कंडीशनर और कूलर का भी इस्तेमाल नहीं के बराबर कर रहे हैं जो की इस गर्मी के मौसम में एक आश्चर्य घटना है। ध्वनि प्रदूषण भी अभूतपूर्व ढंग से कम हो गया है। तापमान ज्यादा होने पे भी उतनी गर्मी नहीं लग रही है जितनी पिछले साल थी।

बता दें कि कई महीनों से रांची में वाहन प्रदूषण के खिलाफ जांच अभियान चलाया जा रहा था। जगह-जगह दोपहिये एवं चार पहिये वाहन, मिनी बस और टेंपू समेत विभिन्न कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण स्तर को चेक किया जा रहा था और निर्धारित मात्रा से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी। इसके बाद भी न तो वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा कम हो रही थी और न ही वायु प्रदूषण में कमी आ रही थी। लेकिन, कोरोना के भय से सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या में आयी भारी गिरावट आने के कारण पिछले दो महीनो से इसमें काफी सुधार दिख रहा है।

वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं। रांची का एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु प्रदुषण के कम हो जाने से ५० - ७० के बीच आ गया है जो पिछले साल १२० से १४० तक रहता था। ये हवा मनुष्य के स्वस्थ लिए फायदेमंद है। वायु और धुल प्रदुषण के काफी कम हो जाने से आसमन में रात को सारे तारे दिखा रहे हैं जो पहले नहीं दीखते थे और उनकी पहचान कर पाना भी अधिक आसान हो गया है। सप्त ऋषि से लेके ध्रुव तारा तक।

इन दिनों आसमान का रंग भी हर जगह से लगभग एक जैसा बेदाग नीला दिख रहा है। सूर्यास्त के बाद भी आसमान नीला और पूरा साफ़ दिख रहा है । ध्वनि प्रदुषण तो इतना कम है की आपकी आवाज दूर तक सुनाई दे रही है। चिड़ियों का चहचहाना सुबह से ही शुरू हो जा रहा है। कुछ लोगो ने तो यहाँ तक कहा की रात दो बजे भी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है खासकर कोयल और बुलबुल की। कुछ ऐसी भी चिड़ियाँ नज़र आ रही हैं जो पहले कम दिखती थीं जैसे बुलबुल।

कुछ दिन पहले रांची शहर और उसके आस पास के गांवों में काफी अधिक मात्रा में तितलियाँ दिखी जो पहले कम दिखती थीं कारण है वातावरण में नमी और प्रदुषण का कम होना। कैटरपिलर कीड़े भी खूब दिखे। दो प्रकार की सबसे रोचक घटना हुई इस लॉक डाउन में वो है २० मई के मध्य रात्रि को ऐसा महसूस हुआ जैसे की सुबह के ४ बज रहे हैं इतनी रौशनी थी आसमान में। इसका कारण था वातावरण में धुल कण का कम होना जिसकी वजह से बादलों से शहर की रौशनी का परावर्तन बहुत अच्छे से हो रहा था।

दूसरी घटना २८ मई को हुई जब रांची में दोपहर से धुंध ( कोहरा) दिखा। तापमान भी २४ डिग्री के आस पास। ठण्ड का एहसास हो रहा था। गर्मियों में जब आद्रता १०० % तक पहुँच जाता है तब ये धुंध बनता है। ऐसी घटना शायद ५० -६० साल पहले हुई हो। बचपन में सुनते थे की रांची में गर्मी में बादल नीचे उतर आते थे और ठण्ड लगती थी । आज के मौसम को देख के लग रहा है की जैसे रांची १०० साल पीछे चला गया है। शायद इसीलिए रांची को अंग्रेज़ों ने ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था।

जहाँ पहले रांची में फ़रवरी से ही भूमिगत जल नीचे चला जाता था और चापाकल सूखने लगते थे इस वर्ष स्थिति कुछ अच्छी है। कम तापमान होने की वजह से मिट्टी से वाष्पीकरण काफी कम है वहीं बीच बीच में बारिश हो जाने से मिट्टी में नमी बनी हुई है। लॉक डाउन की वजह से बड़े बड़े मॉल और होटल्स बंद हैं जिसकी वजह से भूमिगत जल का दोहन भी कम हो रहा है।

इस लॉक डाउन से एक और बड़ा फायदा नदियों को होगा। हर साल प्रदूषित रहने वाली नदियां अब खुल के सांस ले पा रही होंगी। पेड़ एवं फूल पौधे भी खुल के सांस ले रहे होंगे क्योंकि उनके पत्तों पे अब कोई धुल कण नहीं बैठ रहा होगा। आने वाले मौसम पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। तापमान हो सकता है की औसत से कम हो। गाड़ियों और फैक्टरियों के बंद होने से ग्रीन हाउस गैस जो ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है का उत्सर्जन भी नहीं के बराबर है ।