"भारतीय सिनेमा " का इनसाइक्लोपीडिया



चौराहा टीम
अनामिका प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक "भारतीय सिनेमा " वस्तुतः भारत की सभी भाषाओँ के सिनेमा का इनसाइक्लोपीडिया है| हम सिनेमा की बात करते है तो अक्सर यही समझा जाता है कि बम्बई में बनने वाली हिन्दी फि़ल्में ही भारत का सिनेमा है। यह धारणा केवल उत्तर भारत और हिन्दी भाषी प्रदेशों के निवासियों की ही नहीं है, देश के बड़ी आबादियों वाले कई महानगरों के अधिकांश निवासी भी ...

माया नगरी की माया



अतुल शर्मा
फिल्म इंडस्ट्री पर कुछ बोल देने मात्र से मुंबई रूठ गई। थाली में छेद होने लगे। अचानक मुंबई को इतना दर्द क्यों हो रहा है? क्यों कल तक भाजपा की बंशी बजानेवाले संजय राउत अब हर बात को शिवाजी महाराज और मराठी अस्मिता पर प्रहार मान रहे है? ऐसा क्या खास है फिल्मी सितारों में कि उनकी कोई आलोचना नहीं कर सकता। जैसे ही कोई मुंबई फिल्म इंडस्ट्री ...

समीर चौधरी : मध्यमैदान के बेताज बादशाह

कुल तीन बार संतोष ट्रॉफी राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में बिहार राज्य टीम का प्रतिनिधित्व करनेवाले रांची के थड़पखना निवासी समीर चौधरी को पिछली सदी के पचास के दशकों में बिहार तथा रांची के फुटबॉल में मध्य मैदान का बेताज बादशाह माना जाता था। राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में उन्हेंं वर्ष 1952, 1954 और 1957 में बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ था।

खेल में गवां दी जान



हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरुद्दीन खान का जन्म 2 जुलाई 1933 ई० को उत्तर प्रदेश के जिला ग़ाज़ीपुर में कमसारोबार इलाके के मौजा गोड़सरा गांव स्थित एक ज़मीदर परीवार में 'अहाता' नामक स्थान पर मुंसी नबी बख्श खां के घर हुआ था। इनके पिता का नाम मोलवी मु० मोहिउद्दीन उर्फ मोहा खां (तहसीलदार) तथा माता का नाम मरीयम बीवी था।

क्या सुशांत सिंह की मौत उठाएगा सच से पर्दा ..



34 वर्षीय सुशांत सिंह राजपूत एक उभरता हुआ सितारा जो शायद बहुत देर तक चमकता, लेकिन वक्त से पहले बुझ गया। 14 जून 2020 को उसकी मौत की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इसकी रहस्यमई मौत ने कई तरह के विवाद को जन्म दे दिया। अब सीबीआई जांच हो रही है, लगभग सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत के दोषियों के करीब पहुंच जाएगी।

चौंकाते रहे हैं धौनी



परवेज कुरैशी

74 वें स्वतंत्रता दिवस के दिन रात्रि लगभग सात से आठ बजे बीच अचानक सोशल मीडिया में खबर चलने लगी कि माही महेंद्र सिंह धौनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। धौनी के फैंस के लिए यह खबर किसी बुरे सपने की तरह थी।

हिंदी सिनेमा का पहला आदिवासी नायक



झारखंड में लूथर तिग्गा एक अनजाना, अनसुना और मामूली नाम है। रांची के चुटिया स्थित ढुमसा टोली में रहता है यह 87 वर्षीय बूढ़ा। जिसके घर के सामने से रोजाना सैंकड़ों गाड़ियां गुजरती हैं, पैदल वाले पार होते हैं, अगल-बगल के दूकानों में सुबह-शाम भीड़ जमा रहती है पर कोई नहीं जानता कि यहां एक लीजेंड्री आदिवासी अभिनेता रहता है।
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