अब बलूचिस्तान की आज़ादी का समय

Johar

अतुल शर्मा

पाकिस्तान में बलूच राष्ट्रवादीयों पर पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी शासन द्वारा लगातार किए जा रहे दमन के चरमोत्कर्ष के बाद अपनी आज़ादी के लिए पाकिस्तानी सेनाओं पर लगातार हमलों में वृद्धि ने CPEC सहित चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं को जोखिम में डाल दिया है और इसके कारण लागतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जबकि अरब सागर में स्थित ग्वादर पोर्ट पर उसके रणनीतिक हितों को लेकर इस्लामाबाद और तेहरान के बीच छद्म युद्ध ज़ोर पकड़ रहा है ।चीन द्वारा संचालित बलूचिस्तान प्रांत में राष्ट्रवादीयों द्वारा अपनी आज़ादी के लिये लगातार किए जा रहे संघर्षों के बीच $60 बिलियन की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) की सुरक्षा जोखिम में पड़ रही है । बलूच राष्ट्रवादियों पर विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों को निशाने का आरोप लगाया जा रहा है, यहाँ तक की पिछले साल कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला के किए भी बलूच राष्ट्रवादियों को दोषी ठहराया गया था।

विशेषज्ञों की माने तो बलूच गुटों ने हाल ही में सिंध प्रांत और इसकी प्रांतीय राजधानी कराची में भी अपने अभियानों का विस्तार किया है।सिंध में बीजिंग के दांव उतने ही ऊंचे हैं, जितने संसाधन संपन्न बलूचिस्तान में हैं। बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह को कुचलने के लिए तैनात पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ बलूचिस्तान के कई हिस्सों में सार्वजनिक गुस्से की लहर के कारण बीजिंग के रणनीतिकार ने भी इसके जोखिम का मूल्यांकन शुरू कर दिया है।

प्राकृतिक संसाधनों जैसे तेल, गैस, तांबा और सोने से भरपूर बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, लेकिन सबसे कम आबादी वाला राज्य। बलूचिस्तान की जनसंख्या १.३ करोड़ है, जो देश की कुल जनसंख्या का केवल 7% प्रतिशत है। अधिकांश निवासी बलूच हैं; अन्य समुदायों में पश्तून और ब्राह्य शामिल हैं। सालों से बलूचिस्तान में सुई क्षेत्र की प्राकृतिक गैस ने पाकिस्तान भर के बिजली संयंत्रों, कारखानों और घरों के स्टोवों को ईंधन दिया लेकिन संघीय सरकार ने कभी भी बलूचिस्तान प्रांत को इसकी हिस्सेदारी नहीं दी।प्रांत में लगभग 90 प्रतिशत बस्तियों में पीने का साफ पानी नहीं है और वहां के लोग राष्ट्रीय औसत से कम कमाते हैं। पाकिस्तान का भेदभाव पूर्ण दृष्टिकोण, जिसमें पाकिस्तान की सेना की कार्रवाइयाँ भी शामिल है, को अक्सर युवा बलूच को अलगाववादी समूहों की ओर धकेलने के लिए दोषी ठहराया जाता है। सुरक्षा बलों पर निष्पक्ष परीक्षण के बिना राष्ट्रवादियों को मारने और उनके शवों को डंप करने का आरोप है। सालों से लापता बलूच कार्यकर्ताओं के शव सूबे के अलग-अलग हिस्सों में सामने आए हैं।बलूच राष्ट्रवादियों को भारत से बहुत उम्मीदें हैं ।

पाकिस्तान के क्षेत्र के भीतर एक प्रांत होने के बावजूद, बलूचिस्तान के लोगों ने देश के 73 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीयों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की और कहा कि उन्हें पाकिस्तान और उसके सैन्य प्रतिष्ठान के प्रभुत्व से मुक्त करने के लिए भारत के समर्थन की आवश्यकता है।

पिछले साल अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन के साथ बलूचिस्तान में पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर विस्तार से अपनी बात रखी और दुनिया भर का ध्यान बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किये जा रहे अत्याचार पर आकर्षित किया। संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान में पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों को भारत ने आवाज़ दी। भारत ने उल्लेख किया कि पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के मानव अधिकारों का व्यवस्थित रूप से दुरुपयोग और उल्लंघन किया है, जिसमें बलूचिस्तान भी शामिल है। मोदी के भाषण के बाद बलूच अलगाववादी नेता ब्रह्मदग बुगती ने भारत में राजनीतिक शरण का अनुरोध किया था जिस पर विचार चल रहा है। बलूचिस्तान के लिए भारत कितना महत्वपूर्ण है इसे इस संदेश से समझना चाहिए । “मैं अपने भारतीय भाइयों और बहनों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूं। पिछले 70 वर्षों में उन्होंने जो सफलता हासिल की है, वह भारतीयों को गौरवान्वित करती है। आज, भारतीयों को दुनिया भर में गर्व है। हम बलूच उनकी एकजुटता और मदद के लिए आभारी हैं। हम चाहते हैं कि वे एक मुक्त बलूचिस्तान के लिए अपनी आवाज बुलंद करें। हमें उनके समर्थन की आवश्यकता है। धन्यवाद और जय हिंद, "बलूच कार्यकर्ता, अट्टा बलूच।

बलूचिस्तान पर विचार करते हुए भारत को यहां दो बिंदुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि कश्मीर और बलूचिस्तान बहुत अलग हैं:

1. कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रचार का वैध काउंटर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति को उजागर करना है।

2 . युद्ध या प्रचार युद्ध में भी, मानवीय पहलू होते हैं। कुछ चीजें - जैसे एक मुद्दे को दूसरे के लिए एक काउंटर के रूप में खेला जा रहा है - भले ही एक रणनीति के रूप में सच हो, भारत को बलूचिस्तान के मामले में इस से परहेज़ करना चाहिए ।

इसमें भारत सरकार ने परिपक्व प्रतिक्रिया दिखाई है। इसने बलूचिस्तान के साथ पीओके की बराबरी नहीं करके सही काम किया है। पीओके भारतीय क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान अवैध रूप से कब्जा कर रहा है। दूसरी ओर, भारत पाकिस्तान के बलूचिस्तान पर कभी भी कब्जे का हिमायती नहीं है ।

बलूचिस्तान पर भारत की नीति कुछ ऐसी है जो विश्लेषकों या निर्णय निर्माताओं के करीबी लोगों के पास अभी तक नहीं है। यह एक बारीकी से संरक्षित रहस्य है जो सरकार और नौकरशाहों में कुछ ही लोग जानते हैं।

ऐसे समय में जब इस्लामाबाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जम्मू और कश्मीर की बदलती स्थिति के मद्देनजर कार्रवाई करने का आग्रह कर रहा है, यह उल्लेखनीय है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन, पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान के दमन पर,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकारों संगठनों के साथ भारत को भी पैनी नजर रखनी होगी, ताकि बलूचों के साथ न्याय हो सके और उनके सम्मान की रक्षा। बलूचिस्तान की आज़ादी ही एक मात्र रास्ता है बलूच लोगों के आत्मसम्मान का।

( लेखक रक्षा और विदेश मामलों के जानकार है और ये लेखक के व्यक्तिगत विचार है )

 

समाजनामा

///////////////////////////////////////////////////////////////////////