गौरवपूर्ण साहित्यिक शब्द-यात्रा



लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

साहित्य अमृत के रजत जयंती अंक का संपादकीय लिखते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह प्रसन्नता तब और भी बढ़ जाती है, जब इतने लंबे लॉकडाउन के बाद यह अंक आपके समक्ष आ रहा है। किसी साहित्यिक पत्रिका का पच्चीस वर्ष तक नियमित-निर्बाध प्रकाशन निश्चय ही एक गौरवमयी उपलब्धि है। अत्यंत समृद्ध प्रतिष्ठानों द्वारा लोकप्रिय पत्रिकाओं के अचानक बंद कर देने के आघातों से साहित्यप्रेमी भलीभाँति परिचित हैं। अनेक पत्रिकाओं को हमने सीमित साधनों तथा अर्थाभाव के कारण भी बंद होते देखा है हालाँकि उनमें स्तरीय सामग्री का प्रकाशन होता था तथा उनके संकल्प भी नेक थे।

हर माह सही समय पर पाठकों को नियमित पत्रिका पहुँचाने के साथ-साथ ‘साहित्य अमृत’ के विशेषांकों की गौरवशाली परंपरा रही है। विभिन्न अवसरों पर साहित्य अमृत ने यादगार विशेषांक निकाले हैं, जिनमें—‘प्रवेशांक’ (अगस्त, १९९५), ‘राजभाषा विशेषांक’ (सितंबर, १९९९), ‘शतांक’ (नवंबर, २००३), ‘विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक’ (जून २००३), ‘जनाकांक्षा अंक’ (अगस्त, २००४), ‘पं. विद्यानिवास स्मृति अंक’ (मार्च-अप्रैल, २००५), ‘दशकांक’ (१०वाँ वर्ष) (अगस्त, २००५), ‘विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक’ (जुलाई, २००७), ‘भारतीय भाषा अंक’ (१५०वाँ) (जनवरी, २००८), ‘विष्‍णु प्रभाकर स्मृति अंक’ (जून, २००९), ‘कविता विशेषांक’ (अगस्त, २०१०), ‘अज्ञेय जन्मशती अंक’ (अक्तूबर, २०१०), ‘जन्मशती—बाबा नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, केदारनाथ अग्रवाल, उपेंद्र नाथ ‘अश्क’’ (फरवरी, २०११), ‘कहानी विशेषांक’ (फरवरी, २०१४), ‘मीडिया विशेषांक’ (२०वाँ वर्ष) (अगस्त, २०१५), ‘डॉ. कलाम पर विशेष विशेषांक’ (अक्तूबर, २०१५), ‘युवा हिंदी कहानी विशेषांक’ (‌दिसंबर, २०१५), ‘स्वाधीनता विशेषांक’ (अगस्त, २०१६), ‘लघु-कथा विशेषांक’ (जनवरी, २०१७), ‘लोक-संस्कृति विशेषांक’ (अगस्त, २०१७), ‘वै‌श्विक हिंदी विशेषांक’ (अगस्त, २०१८), ‘अटल स्मृति विशेषांक’ (दिसंबर, २०१८), ‘शौर्य विशेषांक’ (अगस्त, २०१९), ‘गांधी विशेषांक’ (जनवरी, २०२०) प्रमुख हैं।

पच्चीस वर्ष के दीर्घकाल में तरुणाई के सृजनात्मक कृतित्व एवं अभ्यर्थना के लिए ‘साहित्य अमृत’ ने समय-समय पर विभिन्न विधाओं में लेखन-प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं, जिनमें वर्ष २००६ में आयोजित ‘युवा हिंदी कहानी प्रतियोगिता’ में १६५ कहानीकारों ने भाग लिया। जनवरी-२००८ में ‘युवा हिंदी कविता प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ, जिसमें शताधिक कवियों ने अपनी क‌व‌िताएँ भेजीं। अगस्त-२००९ में ‘युवा हिंदी व्यंग्य लेखन प्रतियोगिता’ में ४५ व्यंग्य लेखकों ने भाग लिया तथा दिसंबर-२०१५ की ‘युवा हिंदी कहानी प्रतियोगिता’ में कुल २०२ कहानीकारों ने भाग लिया।

यशस्वी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी की प्रेरणा तथा विद्यानिवास मिश्रजी जैसे विद्वान् संपादक के मार्गदर्शन में श्यामसुंदरजी द्वारा प्रारंभ की गई इस पत्रिका ने कभी भी व्यावसायिक दृष्टिकोण न रखते हुए साहित्य-सेवा का ही लक्ष्य रखा है। देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठित विद्वानों, साहित्यकारों का भरपूर स्नेह तथा सहयोग इस पत्रिका को मिला है और पाठकों का अपार समर्थन न होता तो फिर पच्चीस वर्षों की यात्रा क्या संभव हो पाती! प्रस्तुत अंक में पिछले २५ वर्षों में प्रकाशित स्मृतिशेष महान् विद्वान् साहित्यकारों की रचनाएँ आपको पढ़ने को मिलेंगी। चाहे वे विद्यानिवास मिश्र, विष्‍णुकांत शास्‍त्री, लक्ष्मीमल्ल सिंघवी, शंकरदयाल सिंह, कुबेरनाथ राय, कृष्‍णदत्त पालीवाल, विवेकी राय जैसे विद्वान् हों अथवा विष्‍णु प्रभाकर, निर्मल वर्मा, कमलेश्वर, मनोहर श्याम जोशी, महीप सिंह जैसे कथाकार अथवा कुँवर नारायण, केदारनाथ सिंह, कैलाश वाजपेयी, इंदु जैन, बालकव‌ि बैरागी जैसे कवि। स्‍मृतिशेष रचनाकारों के अतिरिक्त वर्तमान साहि‌ित्यक परिदृश्य में हर विधा के श्रेष्ठतम रचनाकारों की रचनाएँ भी इस ‘रजत जयंती विशेषांक’ में सँजोई गई हैं। देश के अत्यंत लोकप्रिय रचनाकारों की रचनाएँ भी इस अंक में मिलेंगी। यह भी प्रयास किया गया है कि इस अंक में साहित्य की प्रायः सभी विधाओं का समावेश हो सके।

आशा है कि प्रस्तुत अंक को आप सभी पाठकों का प्यार मिलेगा।

लक्ष्मी शंकर वाजपेयी पत्रिका के संपादक हैं। साहित्य अमृत का संपादकीय अंश।

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