लोक से संपृक्त कविताएं




कविता को सृष्टि का स्पंदन कहा जा सकता है। इस सम्मोहक सृष्टि का श्री गणेश उसके रचयिता ब्रह्मा के मुख से निसृत मंगलाचरण अर्थात् कविता के मंगल-गान से ही हुआ। मनुष्य की हर धड़कन की अभिव्यक्ति का सामर्थ्य बोली की वाचिकता में होती है और पद्य बोलियों के सबसे नजदीक बैठता है। इसलिए विश्व की समस्त भाषाओँ ने सर्वप्रथम अपने-अपने साहित्य में कविताओं का ही सृजन किया।

समकालीन कविताएँ हताश समय को चीन्ह रही हैं और उनके साथ लड़ रही हैं। यशकामी कवियों की भीड़ में ऐसे भी कवि या कवयित्रियाँ हैं जिन्हें पढ़ना सुख देता है।
ऐसी ही एक कवयित्री हैं अनिता रश्मि, जिनकी ‘जिन्दा रहेंगी कविताएँ’ कविता संकलन के ठीक बाद ‘अब ख्वाब नए हैं’ कविता संग्रह आपके सामने है।

अनिता रश्मि समकालीन हिदी कथा साहित्य में एक सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। दो उपन्यासों, चार कहानी संग्रहों, एक यात्रावृत्त और एक लघुकथा संग्रह के जरिये बतौर कथाकार उनकी पहचान स्थापित हो चुकी है। अनिता रश्मि झारखंड के समकालीन काव्य-परिसर में बड़ी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

इस नए संग्रह ‘अब ख़्वाब नए हैं’ में उनकी बहत्तर कविताएँ, आठ छोटी कविताएँ और तेरह नन्हीं कविताएँ संकलित हैं।
अनिता रश्मि के पूर्व काव्य-संग्रह ‘ज़िंदा रहेंगी कविताएँ’ की कविताओं में मुख्य रूप से ग्राम्य परिवेश के प्रति गहरा लगाव दिखता है. बैलगाड़ी, नदी, पहाड़, खेत, धान की बालियाँ, पाकड़, धूप, पहाड़ से उतरती औरतें, गुलाब, टेसू, अमलतास, महुआ, कोहरे से ढँका गाँव, बादल, आकाश, घाम, झाड़ी-झुरमुट आदि ग्राम्य प्रकृति के अनेक ताजा चित्र इस संकलन की कविताओं में मौजूद हैं। ग्रामीण शब्दावली का प्रयोग भी इन कविताओं में हुआ है। बेतरा, फूलखुँदी, बोरसी, गाछ, बतकही, छउआ-पुता, मइयाँ, ललछौहीं, टटकी आदि। ‘ज़िंदा रहेंगी कविताएँ’ संकलन में आत्मीयता, लोकसंपृक्ति और एक ख़ास हद तक रोमानी अंदाज है। नए काव्य-संग्रह ‘अब ख़्वाब नए हैं’ की कविताओं की भावभूमि, टेनोर और टेक्सचर थोड़ा हटकर है।


अनिता रश्मि के लगाव कितने विविध हैं - यह बात स्वयं इस संग्रह की कविताएँ बताती हैं। अपनी अनुभूतियाँ, पीड़ा, अपने सुख-दुख, अपने प्रेम को अपनी कविताओं में पाने और बांँटने के लिए जिन ठिकानों की ओर जाना-लौटना पसंद करती हैं, उनमें से एक ठिकाना तो गाँव है जिसके प्रति उन्हें गहरा लगाव है, दूसरा ठिकाना उनका परिवार है जहाँ वे जन्मी, पली और बड़ी हुईं, तीसरा ठिकाना गाँव से शहर तक फैला वह वृहत्तर समाज है जिसमें एक ओर आभिजात्य वर्ग है तो दूसरी ओर जीने के लिए जद्दोजेहद करता दलित, वंचित, निर्धन और सताये हुए लोगों का वर्ग, चौथा ठिकाना है प्रकृति की वह मनोरम और बहुत बड़ी दुनिया जिसमें झांककर वह जीवन-मर्म को पाने और समझने की आकुल चेष्टा करती हैं और उसपर गहरा भरोसा भी कि जब सब साथ छोड़ देंगे तो कोई बोलती चिड़िया, पेड़ की टहनी, बारिश की बूँद, गदराये बादल, लाल पलाश, छत पर फुदकते उदास कबूतर, सुनहली धूप, रुपहली चांदनी, हवा, नन्हा पोखर, बेर, मकई की बालियाँ, ऋतुएँ, आसमान, घास उनकी व्यथा-कथा और प्रकारांतर से मनुष्य की व्यथा-कथा सुनने से इंकार नहीं करेंगी, बल्कि एक अनुकम्पा की तरह साथ रहेंगी। संग्रह की कविताओं में इन्हीं ठिकानों की ओर आवाजाही पाते हैं। उनकी कविता, ‘पगडंडी’ की ये पंक्तियाँ –

पगडंडी अपने साथ लाती है
शहर को गाँव में
और
गाँव को शहर में'



इसी आवाजाही की ओर इशारा करती हैं।
अनिता रश्मि ने अपनी कविताओं में जाने हुए और अनुभव किये हुए को महत्त्व दिया है. कवि नई वस्तु या अनुभव नही खोजता, जो है वह आज का हो अथवा बहुत पहले का उसपर अपना हस्ताक्षर आँक देता है। इस कारण जो पूर्वानुभूत है, उसका साक्षात्कार निपट अपूर्व प्रतीत होता है। इस संग्रह की कविताओं को पढ़ते हुए बार-बार इसकी प्रतीति होती है। इस संग्रह की कविताएँ शांत स्थिर क्षणों में सशक्त, संस्मृत अनुभूतियों का स्वतः स्फूर्त प्रवाह मात्र नहीं हैं, अपितु इनका वर्तमान से, उसकी विद्रूपताओ से, उसके जटिल और क्रूर पक्ष से भी सबंध है।

इस संग्रह की ‘युद्ध’, ‘दर्द’, ‘बैलून वाला’, ‘कत्ल’, ‘अंतर’, ‘साइकिल पर कोयला ढोने वाले के नाम’ ‘पड़ोसी से प्रश्न’ ‘आवाज’ आदि कविताएँ वर्तमान के इसी जटिल और क्रूर पक्ष को चित्रित करती हैं। कवयित्री वर्तमान की भयावहता से विचलित नहीं होतीं। ‘इस समय में’ कविता की ये पंक्तियाँ गौर करने लायक हैं-

‘इस समय में
भयावह प्रश्नों से टकराकर
केवल इसलिए चुपचाप
बैठा नहीं जा सकता कि
दे रही है पृथ्वी हमें
भरपूर स्पेस, नूतन स्वप्न’


‘वसंत’ और ‘चाहत’ जैसी कविताओं में रोमानी अंदाज है तो ‘उम्मीद’ ‘ठूँठ’, ‘अब ख़्वाब नए हैं’ में मनुष्य की अदम्य जिजीविषा और आशावादिता।

इन कविताओं में जीवन और प्रकृति के अनेक रंग रूप, शेड्स, ध्वनियाँ और छवियाँ हैं। रामचन्द्र शुक्ल कहते हैं- ‘कविता वह साधन है जिसके द्वारा शेष सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा होती है.’ अनिता रश्मि जीवन और प्रकृति को बहुत करीब से देखती हैं और उनकी अदाओं और समस्याओं को सरल और अनूठी भाषा के माध्यम से अपनी कविताओं में उतारती हैं। चित्रात्मकता इन कविताओं की एक विशेषता है। इसमें समय के प्रति जवाबदेही और प्रकृति व मनुष्य के प्रति राग और सरोकार है कवियित्री कहती हैं-

बेहतरीन कविताओं के
अलग ही
रंग-ढंग और ढब होते हैं
शब्द-शब्द चलकर
दिल की जमीन पर
कब्जा कर लेते हैं’

इस लिहाज से यह एक उम्दा काव्य-संकलन है। इसे अवश्य पढ़ें!

कविता संग्रह: अब ख़्वाब नए हैं
कवयित्री - अनिता रश्मि
भूमिका - निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव


 

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